पॉवर ट्रांसमिशन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की तैयारी है। पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने तीन दिन पहले हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इसके संकेत दे दिए हैं। पुनर्गठन के पहले चरण में अभियंता के करीब 150 पद समाप्त किए जा सकते हैं। हालांकि, शीर्ष प्रबंधन इस मुद्दे पर बोलने से बच रहा है। वहीं, प्रबंधन की मंशा की भनक लगते ही ऊर्जा संगठन लामबंद हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक पुनर्गठन में कई मंडलों और खंडों का विलय प्रस्तावित है। सूत्रों के मुताबिक गोरखपुर-प्रयागराज को मिलाकर वाराणसी मंडल और मुरादाबाद ग्रेटर नोएडा को मिलाकर मेरठ मंडल बनाया जाएगा। गौतमबुद्ध नगर-गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर- मुरादाबाद और आजमगढ़-गोरखपुर खंडों के विलय की भी योजना है।
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प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, अधीक्षण अभियंता के सात से पांच, अधिशासी अभियंता के 22 से 15, सहायक अभियंता के 62 से 30 तथा अवर अभियंता (जेई) के 180 से 80 पद करने का प्रस्ताव है। पदों का यह आंकड़ा वर्तमान पदों से करीब डेढ़ सौ कम है। इसे देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि प्रबंधन ट्रांसमिशन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन के बहाने निजीकरण की कोशिश कर रहा है। भविष्य में नियमित और संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी होगी।
यूपीएसएलडीसी में भी समस्या
उत्तर प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (यूपीएसएलडीसी) लखनऊ के तहत मुख्य कंट्रोल रूम और चार एरिया लोड डिस्पैच सेंटर स्थापित है। इनमें चार पालियों में अभियंताओं की ड्यूटी लगती है। हर पाली में एक अधिशासी तथा तीन सहायक अभियंताओं की ड्यूटी लगती रही है। इस वक्त तीन अभियंताओं की ही ड्यूटी लग रही है। कभी-कभी दो की ही ड्यूटी लगती। क्योंकि यहां के अभियंताओं को अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।