स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों, नर्सिंग व पैरामेडिकल कर्मियों का तबादला किया गया है। इसमें मृतक तक का स्थानांतरण कर दिया गया। दांपत्य, विकलांग, बीमार और दो साल के अंदर स्थानांतरित होने वालों के दोबारा स्थानांतरण होने जैसे मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग में तबादलों से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। अब तक 350 से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं। उधर महानिदेशक की बनाई पांच सदस्यीय टीम मामले की पड़ताल में जुटी है लेकिन शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ने से टीम तीन दिन में रिपोर्ट दे पाएगी, इस पर संशय है। उधर ज्यादातर मामले में अधूरे रिकॉर्ड होने और विभाग की टीमों के बीच समन्वय न होने की समस्या आ रही है।
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स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों, नर्सिंग व पैरामेडिकल कर्मियों का तबादला किया गया है। इसमें मृतक तक का स्थानांतरण कर दिया गया। दांपत्य, विकलांग, बीमार और दो साल के अंदर स्थानांतरित होने वालों के दोबारा स्थानांतरण होने जैसे मामले सामने आए हैं। बृहस्पतिवार को पांच सदस्यीय टीम ने करीब 80 आवेदनों की पड़ताल की। इसमें ज्यादातर में दांपत्य नियमों की अनदेखी हुई है।
सूत्र बताते हैं कि पड़ताल में पता चला कि स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग यूनिटों के बीच समन्वय का अभाव रहा है। कई कर्मियों के आवेदन पत्र में यह लिखा ही नहीं गया है कि उनके पति अथवा पत्नी भी संबंधित विभाग में कार्यरत हैं। इसकी वजह से भी समस्या आई है। मृतकों का नाम स्थानांतरण सूची में होने की प्रमुख वजह दस्तावेज का अपडेट न होना पाया गया है। विभागीय दस्तावेज में संबंधित व्यक्ति का नाम दर्ज होने से स्थानांतरण के दायरे में शामिल कर लिया गया है।
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तकनीकी रूप से भी नहीं हो पाया समन्वय
विभाग में विभिन्न संवर्ग के कर्मचारी हैं। जैसे- अगर कोई व्यक्ति चिकित्सा संवर्ग में है और उसकी पत्नी नर्सिंग संवर्ग में है तो दोनों के दस्तावेजों को मिलान न तो ऑफलाइन हो पाता है और न ही ऑनलाइन। ऐसे में दोनों का अलग-अलग मंडल या जिलों में स्थानांतरण की बात सामने आई है।