प्रदेश के छह जिले टीकाकरण के लिहाज से संवेदनशील हैं। इन जिलों में कोविड वैक्सीन की दोनों डोज लेने वाले 18 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 90 फीसदी से कम है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग इन जिलों में टीकाकरण के लिए विशेष अभियान चला रहा है। इसके तहत लोगों को फोन किया जा रहा है और घर-घर टीमें भेजी जा रही हैं।
प्रदेश में 18 साल से अधिक उम्र वालों में पहली डोज लेने वालों की संख्या लक्ष्य के सापेक्ष 104 फीसदी तक पहुंच गई है। अमरोहा में 98.02 और गौतमबुद्धनगर में 134.12 फीसदी टीकाकरण हुआ है। पर 18 साल से अधिक उम्र वालों में दूसरी डोज की संख्या 97.91 फीसदी है। सिद्धार्थनगर में 86.38 फीसदी, महोबा में 87.92, कन्नौज में 89.16, मेरठ में 89.41, आगरा में 89.72 और कासगंज में 89.41 फीसदी लोगों ने टीके की दूसरी डोज ली है।
ये छह जिले दूसरी डोज लगवाने वालों के लिहाज से संवेदनशील माने गए हैं। इसलिए इन जिलों में टीकाकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उधर, लखनऊ सहित 19 जिले में 90 से 95 फीसदी लोगों ने टीके की दोनों डोज ले ली है जबकि 50 जिले में 95 फीसदी से अधिक टीकाकरण हुआ है।
शाहजहांपुर में 113.12 फीसदी टीकाकरण
प्रदेश में 100 फीसदी से अधिक दोनों डोज लेने वाले जिलों की संख्या 29 है। सर्वाधिक 113.12 फीसदी टीकाकरण शाहजहांपुर, 107.86 फीसदी मैनपुरी, 107.35 फीसदी सुल्तानपुर और 107.05 फीसदी इटावा में हुआ है।
कम या ज्यादा टीकाकरण की हैं ये वजहें
राज्य टीकाकरण प्रभारी डॉ. अजय घई ने बताया कि जिन छह जिलों में दोनों डोज लेने वालों की संख्या कम है, वहां से दूसरे जिलों में आवागमन करने वालों की संख्या अधिक रहती है। मेरठ और आगरा के ज्यादातर लोग रोजाना दिल्ली व राजस्थान आते-जाते हैं। ऐसे में संभव है कि ये लोग वहां टीकाकरण करा लिए हों।
इसी तरह महोबा व सिद्धार्थनगर में एक तरफ जागरूकता का अभाव है तो दूसरी तरफ यहां से पलायन अधिक होता है। फिर भी पहले टीके के रिकॉर्ड को देखते हुए वहां नए सिरे से सर्वे शुरू कराया गया है। जिन जिलों में अधिक टीकाकरण हुआ है, उसके भी पीछे यही वजह है कि वहां आसपास के दूसरे जिले के लोग आकर टीका लगवा लिए हैं।