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UP News : रिश्तों में संपत्ति देने पर मिली स्टांप में छूट तो बंपर बैनामे, तीन माह में 1.30 लाख दानपत्र पंजीकृत

Wed, 28 Sep 2022 07:12 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

मंत्री रविंद्र जायसवाल ने इस योजना से जुड़ी प्रगति केबारे में बुधवार को विधानभवन स्थित सभाकक्ष में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 18 जून 2022 को प्रदेश सरकार ने रक्त संबंधों में संपत्ति हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क में छूट दी थी। इस पर केवल पांच हजार रुपये स्टांप शुल्क तय कर दिया गया।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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रिश्तों में संपत्ति हस्तांतरण करने के लिए स्टांप शुल्क में छूट मिली तो प्रदेश में लोगों ने जमकर आपसी संबंधों में बैनामे कराए। केवल तीन महीनों में 130596 दानपत्र पंजीकृत  हुए और पिछले साल के मुकाबले लगभग दो गुना ज्यादा राजस्व की प्राप्ति हुई। इस बाबत स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने कहा कि सरकार का प्रयास रंग लाया है और इससे परिवारों के बीच आपसी सौहार्द बढ़ा है।

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मंत्री रविंद्र जायसवाल ने इस योजना से जुड़ी प्रगति केबारे में बुधवार को विधानभवन स्थित सभाकक्ष में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 18 जून 2022 को प्रदेश सरकार ने रक्त संबंधों में संपत्ति हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क में छूट दी थी। इस पर केवल पांच हजार रुपये स्टांप शुल्क तय कर दिया गया। इस योजना का प्रदेश की जनता ने भरपूर लाभ उठाया है। 18  जून से 27 सितंबर 2022 तक लगभग  3 महीनों में कुल 1,30,596 दानपत्र पंजीकृत कराए गए। हैं। इससे विभाग को 449 करोड़ की आय प्राप्त हुई। पिछले साल की बात करें तो इन्हीं तीन माह में मात्र 20867 दानपत्र रजिर्स्ड कराए गए थे। इनसे 230 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई थी। इस योजना में पिता, माता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, पुत्रवधु, दामाद, सगा भाई, सगी बहन, पुत्र या पुत्री का पुत्र संपत्ति का हस्तांतरण कर सकते हैं।
 
विवाद न हों, इसलिए लिया था  फैसला
मंत्री जायसवाल ने बताया कि परिवारों में अधिकांश विवाद अचल संपत्तियों में बंटवारे को लेकर होता थे। इससे न्यायालय में मुकदमों की संख्या भी बढ़ रही थी। सरकार ने इसी को देखते हुए  यह निर्णय लिया था। पहले  पारिवारिक सदस्यों के मध्य अचल संपत्तियों के हस्तांतरण पर लगने वाले स्टांप ड्यूटी को 6-7 प्रतिशत से घटाते हुए मात्र 5000 रुपये अधिकतम करने का एक बड़ा निर्णय लिया। इस मौके पर स्टांप महानिरीक्षक कंचन वर्मा ने बताया कि पहले परिवार के मुखिया तक संकोच कर वसीयतों का सहारा लेते थे। वसीयत मृत्यु के बाद प्रभावी होती थी और तब तक परिवार में तनाव एवं विवाद की स्थिति बनी रहती थी। इन तीन माह में बीस हजार वसीयतों में कमी आई जो बैनामों में बदल गई।

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