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UP News : पीडब्ल्यूडी में 8914 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट सरेंडर, शासन की चेतावनी रही बेअसर

Tue, 18 Apr 2023 10:14 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ

सार

वर्ष 2022-23 में पीडब्ल्यूडी की कामकाज पटरी से उतरा रहा। इसकी शुरुआत जून-जुलाई में तबादलों में घपलों को लेकर शुरू हुई। मंत्री जितिन प्रसाद के ओएसडी अरुण कुमार पांडेय को कार्यमुक्त कर केंद्र को वापस कर दिया गया।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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पीडब्ल्यूडी को 8914 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट सरेंडर करना पड़ा है। यह अब तक किसी एक वित्त वर्ष में सरेंडर हुई सबसे अधिक राशि है। इस मामले में बार-बार जारी की गई शासन की चेतावनी भी बेअसर रही। अब शासन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

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पीडब्ल्यूडी के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के मूल बजट में 24590 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। इसमें अधिष्ठान की राशि शामिल नहीं है। 18627 करोड़ रुपये सड़कों के लिए, 3049 करोड़ रुपये सेतुओं के लिए और 277 करोड़ रुपये भवन मद में व्यवस्था की गई। स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत विभिन्न कामों के लिए 2134 करोड़ रुपये दिए गए।

दिसंबर-2022 तक बजट खर्च करने की रफ्तार बेहद धीमी रही, जबकि बड़ी संख्या में सड़कों की हालत खस्ता बनी हुई थी। इसके बावजूद अनुपूरक बजट में और अधिक राशि की मांग की गई। दिसंबर में आए अनुपूरक बजट में विभाग को 2550 करोड़ रुपये और दिए गए।
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पुनर्विनियोग की राशि को भी जोड़ दें तो वित्त वर्ष 2022-23 में पीडब्ल्यूडी को कुल 27140 करोड़ रुपये का बजट दिया गया। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, इसमें से 8914 करोड़ रुपये 31 मार्च तक उपयोग में न आने के कारण सरेंडर करने पड़े। जोकि, कुल आवंटित बजट का करीब 33 प्रतिशत है।

वर्ष 2021-22 में सरेंडर हुए थे 6982 करोड़
वित्त वर्ष 2021-22 में पीडब्ल्यूडी को 23562 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ था, जिसमें से 6982.36 करोड़ रुपये का बजट सरेंडर करना पड़ा। यह कुल आवंटित बजट का 29.63 प्रतिशत था। इस स्थिति को देखते हुए शासन ने निर्देश दिए कि वित्त वर्ष 2022-23 में समय से स्वीकृतियां जारी हों और ऐसा न होने पर संबंधित अधिशासी अभियंताओं और मुख्य अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके बावजूद सरेंडर राशि की मात्रा घटने के बाद बढ़ गई।

बजट सरेंडर होने की रिपोर्ट मिल चुकी है। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम 10(2) के तहत कार्यवाही की जाएगी। -अजय चौहान, प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी

क्या हो सकती है कार्रवाई
नियम 10(2) के तहत दोषी मिलने पर कार्मिकों को परिनिंदित करने और इंक्रीमेंट रोकने तक की सजा दी जा सकती है।

क्या रहे कारण
वर्ष 2022-23 में पीडब्ल्यूडी की कामकाज पटरी से उतरा रहा। इसकी शुरुआत जून-जुलाई में तबादलों में घपलों को लेकर शुरू हुई। मंत्री जितिन प्रसाद के ओएसडी अरुण कुमार पांडेय को कार्यमुक्त कर केंद्र को वापस कर दिया गया। विभागाध्यक्ष मनोज गुप्ता समेत कई अधिकारियों को सस्पेंड करना किया गया। इस दौरान नई स्वीकृतियां जारी होने का काम ठप सा रहा। कार्ययोजना भी समय से अनुमोदित नहीं हो सकी। मंत्री जितिन प्रसाद और उनके तत्कालीन प्रमुख सचिव नरेंद्र भूषण के बीच पटरी न बैठ पाने की चर्चा भी आम रही। माना जा रहा है कि इसके चलते स्वीकृतियां जारी होने का काम अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सका। हालांकि वित्त वर्ष के अंत में 27 फरवरी को नरेंद्र भूषण का विभाग बदला दिया गया। लेकिन, तब तक स्थिति यहां पहुंच चुकी थी कि आवंटित बजट के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल नहीं हो सका।

लैप्स राशि अलग, हो सकती है 1000 करोड़
इतना ही नहीं सरेंडर किए गए बजट में वह राशि शामिल नहीं है, जो समय से उपभोग न हो पाने के कारण लैप्स हो गई। इसमें सेतु निगम का 507 करोड़ रुपये भी शामिल है, जोकि पीडब्ल्यूडी के स्तर से प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण निगम के खाते में नहीं जा पाया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, लैप्स बजट की मात्रा और भी ज्यादा है, लेकिन अभी तक सभी खंडों से इसके आंकड़े इकट्ठा नहीं हो पाए हैं। एक मोटे अनुमान के मुताबिक, यह आंकड़ा 1000 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

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