बैग खराब करने का भी खेल
ब्लड बैंक से जुड़े सूत्रों की मानें तो कर्मचारी ब्लड बैग के खराब होने का भी खेल करते हैं। करीब एक फीसदी बैग के खराब होने की संभावना रहती है। ऐसे में थोक मार्केट से आने वाले स्टॉक को ब्लड बैग के कर्मचारी किसी न किसी कारणवश अपने रिकॉर्ड में खराब दिखाते हैं। यह बैग भी मिलावटखोरी में प्रयोग होता है। बैग खराब होने का रिकॉर्ड दुरस्त किया जाता है, लेकिन उसे नष्ट करने की जिम्मेदारी ब्लड बैंक की होती है। ऐसे में ब्लड बैग नष्ट हो रहा है अथवा उसके नाम पर पॉलीथिन नष्ट किया जा रहा है इसका खुलासा नहीं हो पाता है। एफएसडीए ब्लड बैग नष्ट होने के आंकड़ों पर आंख मूंदकर विश्वास कर लेता है।
काला कारोबार रोकना है तो जांच जरूरी
एफएसडीए के पूर्व सहायक आयुक्त रमाशंकर बताते हैं कि जिस तरह से दवाओं की नियमित जांच होती है, उसी तरह से बैग आपूर्तिकर्ता व ब्लड बैंक की जांच होनी चाहिए। बैग पर बाकायदा बैच नंबर और आपूर्ति संख्या लिखी होती है। जब मिलान नहीं किया जाता तभी दलालों तक बैग पहुंचते हैं। इस काले कारोबार को रोकने के लिए बैग पर विशेष पर फोकस करना होगा।
बैग दलालों तक कैसे पहुंचे जांच होगी
समय-समय पर जांच की जाती है। एसटीएफ ने नकली दस्तावेजों के सहारे गलत तरीके से प्रदेश में लाए जा रहे ब्लड को पकड़ा है। विभाग उनका सहयोग कर रही है। ब्लड बैगों की जांच की जाती है। अतिरिक्त ब्लड बैग दलालों तक कैसे पहुंचा, इसकी फिर से विस्तृत जांच की जाएगी।
- डीके तिवारी, सहायक आयुक्त, एफएसडीए