प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सेवानिवृत्ति के बाद होने वाली दोबारा नियुक्ति में भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में पुनर्नियुक्त की योजना फेल होती नजर आ रही है। अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 तक करीब 113 डॉक्टर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन दोबारा नियुक्ति के लिए सिर्फ 18 डॉक्टरों ने आवेदन किया है। जबकि 56 ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है।
स्वास्थ्य विभाग में प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के करीब 18 हजार पद हैं। इसमें करीब छह हजार खाली चल रहे हैं। हर साल करीब सौ से दो सौ डॉक्टर सेवानिवृत्त भी हो रहे हैं। सेवानिवृत्त होने वाले डॉक्टरों को दोबारा नियुक्ति देने का प्रावधान किया गया है। ये डॉक्टर 65 वर्ष की आयु तक अस्पताल में सेवाएं दे सकते हैं। इसके एवज में उन्हें उनके वेतन के बराबर धनराशि भुगतान की जाती है। लेकिन दोबारा नियुक्ति देने की योजना धीरे- धीरे दम तोड़ती नजर आ रही है। हालत यह है कि कई असेवित जिलों के लिए अब आवेदन ही नहीं आ रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में दोबारा नियुक्ति के लिए तय किए गए करीब 500 पद में करीब 433 पद खाली हैं। इसमें श्रावस्ती, चित्रकूट, बलरामपुर, कासगंज आदि जिलों के लिए आवेदन ही नहीं आ रहे हैं।
74 को मिलेगी दोबारा नियुक्ति
प्रदेश के अस्पतालों को दोबारा नियुक्ति की ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत 18 नए आवेदन आए हैं, जबकि 56 ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने इन 74 डॉक्टरों को तत्काल नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। इनके दस्तावेजों की पड़ताल करने के बाद इन्हें 20 अप्रैल तक नियुक्ति दे दी जाएगी। इन डॉक्टरों से प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करने और पहले से किसी तरह की विभागीय कार्रवाई नहीं होने संबंधित शपथ पत्र लिया जाता है।
दोबारा नियुक्ति में रुचि न लेने की वजह
सरकारी अस्पतालों में कार्य करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले एमबीबीएस डॉक्टर दोबारा नियुक्ति में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके पीछे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि दोबारा नियुक्ति के पद ज्यादातर असेवित जिलों में हैं। सेवानिवृत्त के बाद वे महानगरों में रहना चाहते हैं। ऐसे में दोबारा ग्रामीण इलाके में रहने में उन्हें दिक्कतें होती हैं। पारिवारिक कारणों का हवाला देकर वे दोबारा नियुक्ति से मना कर देते हैं। प्राइवेट प्रैक्टिस की छूट नहीं मिलने की वजह से भी वे सरकारी सेवा से दूर रहते हैं।
क्या कहती हैं जिम्मेदार
अब तक महानिदेशालय में आए आवेदनों की पड़ताल की जा रही है। कोशिश है कि जल्द से जल्द इन डॉक्टरों को तैनाती दे दी जाए।
- डा. लिली सिंह, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग