व्यापारियों के स्तर से दाखिल रिटर्न में कई तरह की खामियां बताकर उनका उत्पीड़न करने को लेकर राज्यकर आयुक्त और शासन स्तर पर भी लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उधर, उत्पीड़न से बचने के लिए बहुत से व्यापारी रिटर्न दाखिल करने से बचने का भी प्रयास करते हैं, जिससे विभाग को राजस्व का नुकसान होने की संभावना बनी रहती है।
रिटर्न की आड़ में हो रहे उत्पीड़न से व्यापारियों को जल्द निजात मिलने वाली है। इसके लिए राज्यकर विभाग ने व्यापारियों के स्तर से दाखिल किए जाने वाले रिटर्न की जांच करने की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है। अब राज्यकर अधिकारियों के अलावा विभागीय डिप्टी व असिस्टेंट कमिश्नर के स्तर पर भी रिटर्न की जांच की जाएगी। इसके बाद ही व्यापारियों को नोटिस जारी की जाएगी। इस बदलाव में व्यापारियों का उत्पीड़न नहीं हो सकेगा।
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दरअसल व्यापारियों के स्तर से दाखिल रिटर्न में कई तरह की खामियां बताकर उनका उत्पीड़न करने को लेकर राज्यकर आयुक्त और शासन स्तर पर भी लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उधर, उत्पीड़न से बचने के लिए बहुत से व्यापारी रिटर्न दाखिल करने से बचने का भी प्रयास करते हैं, जिससे विभाग को राजस्व का नुकसान होने की संभावना बनी रहती है। इन स्थितियों को देखते हुए ही राज्यकर मुख्यालय द्वारा व्यापारियों की ओर से दाखिल रिटर्न की जांच की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
नई प्रक्रिया के तहत अब डिप्टी और असिस्टेंट कमिश्नर के स्तर पर भी रिटर्न की जांच की जाएगी। इसके लिए सभी अधिकारियों के लिए प्रतिदिन जांच करने की संख्या भी तय कर दी गई है। नई प्रक्रिया में डिप्टी कमिश्नर को प्रतिदिन एक व्यापारी के रिटर्न की जांच करनी होगी, जबकि असिस्टेंट कमिश्नर को 3 और राज्यकर अधिकारी को 6 रिटर्न की जांच करनी होगी। यह भी निर्देश दिए गए है कि जांच के बाद पर्याप्त आधार मिलने पर ही व्यापारी को नोटिस जारी किए जाएं। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा बिना पर्याप्त आधार के किसी व्यापारी को नोटिस जारी किया जाएगा, तो उस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।