प्रदेश में नीट यूजी के तहत एमबीबीएस व बीडीएस द्वितीय चरण की काउंसिलिग चल रही है। इस बीच आयुष कॉलेजों में दाखिले की तैयारी शुरू कर दी गई है। आठ सितंबर से पंजीयन शुरू करने की तैयारी है। हालांकि अभी तक कई आयुष कॉलेजों की मान्यता को हरी झंडी नहीं मिलने से सीटों को लेकर संशय बना हुआ है।
प्रदेश में एमबीबीएस व बीडीएस में दाखिले के दो चरण पूरे होने के बाद आयुष कॉलेजों में दाखिला शुरू होता है। इसके तहत विभाग की ओर से काउंसिलिंग को लेकर कमेटी बना दी गई है। इस कमेटी की दो चरण की बैठक हो गई है। इसमें आयुर्वेद, यूनानी एवं होम्योपैथिक विभाग के प्रोफेसरों को शामिल किया गया है। कमेटी की ओर से आठ सिंतबर को पहले चरण की काउंसिलिंग के तहत पंजीयन शुरू करने की तैयारी की गई है। लेकिन अभी तक सभी आयुष कॉलेजों की मान्यता को हरी झंडी नहीं मिल पाई है। इस वजह से सीटें फंसी हुई है।
प्रदेश में बीएचएमएस कोर्स में नौ राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में 829, दो निजी होम्योपैथिक कॉलेज में 61 छात्रों ने दाखिला लिया। इसी तरह बीएएमएस कोर्स में आठ राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेजों में 502 और 58 निजी आयुर्वेद कॉलेज में 3446 छात्रों, एवं बीयूएमएस कोर्स में दो राजकीय यूनानी कॉलेज में 128 और 18 निजी यूनानी में 353 छात्रों ने दाखिला लिया था। इस तरह तीनों विधाओं को मिलाकर कुल 5319 छात्रों ने दाखिला लिया था। इस वर्ष अभी तक दो राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, सात होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को ही केंद्र से मान्यता मिल पाई है। केंद्रीय टीम लगातार कॉलेजों का निरीक्षण कर मान्यता की कार्यवाही को पूरा कर रही है। उम्मीद है कि सात अगस्त तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसी तरह निजी आयुष कॉलेजों की भी सीटें अभी तय नहीं है। इसी रणनीति के तहत सरकारी सीटों के आधार पर आठ सितंबर से आयुष कॉलेजों में काउंसिलिंग की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
क्या कहते हैं मंत्री
आयुष कॉलेजों में निरंतर सुधार किया गया है। अध्यापकों की संख्या के साथ ही संसाधनों का भी विकास किया गया है। सभी सरकारी कॉलेजों में निर्धारित शत प्रतिशत सीटों को मान्यता मिलना तय है। अगस्त अंत तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद काउंसिलिंग शुरू हो जाएगी। निजी कॉलेजों की जैसे-जैसे सीटों को मान्यता मिलती रहेगी, उन्हें काउंसिलिंग में शामिल कर लिया जाएगा।
- डा. दयाशंकर मिश्र दयालु, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एफएसडीए एवं आयुष