मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने माघ मेले के आयोजन के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और मेला क्षेत्र में सफाई आदि की व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर जनवरी से लेकर महाशिवरात्रि के बीच होने वाले प्रमुख स्नान के मौके पर मेला क्षेत्र में आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखने के साथ ही प्रयागराज में भी साफ-सफाई , पेयजलापूर्ति, शौचालय और सड़कों की मरम्मत आदि के काम पर विशेष फोकस किया जाए।
मुख्य सचिव बृहस्पतिवार को यहां माघ मेला की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 6 जनवरी को पौष पूर्णिमा,14 व 15 जनवरी को मकर संक्राति, 21 जनवरी को मौनी अमावस्या, 26 जनवरी को बसंत पंचमी, 5 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 18 फरवरी को महाशिवरात्रि पर मुख्य स्नात होंगे। इसलिए इन तिथियों से पहले माघ मेला की सभी तैयारियों को पूरा कर लिया जाए। शहरी क्षत्रों के अलावा स्वच्छता और सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाए। शहर के सभी चौराहों को पूरी तरह से साफ.-सुथरा रखा जाए।
उन्होंने मेला क्षेत्र का जीआईएस मैपिंग कराने का निर्देश देते हुए कहा कि पिछले वर्ष माघ मेला की तैयारियों में जो कमियां सामने आई थी, उन कमियों को दूर कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र में सभी संपर्क मार्गों पर स्वच्छता, कृषि, महिला सशक्तीकरण, पीएम स्वनिधि आदि से संबंधित पेंटिंग बनाई जाए और इन्हीं से संबंधित डॉक्यूमेन्ट्री, रेडियो जिंगल्स का एलईडी स्क्रीन पर प्रसारण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
बैठक में बताया गया कि माघ मेला क्षेत्र को 6 सेक्टरों में बांटा गया है। पहले सेक्टर में सरकारी कैंप एवं मुख्य संस्थाएं, दूसरे सेक्टर में वेंडिंग जोन, झूला प्रदर्शनी एवं किसान यूनियन, तीसरे सेक्टर में खाक चौक एवं अन्य संस्थाएं, चौथे सेक्टर में आचार्य बाड़ा एवं अन्य संस्थाएं, पांचवे सेक्टर में दंडी बाड़ा एवं अन्य संस्थाएं और छठे सेक्टर में पुलिस स्टेशन एवं स्नान घाट है। बैठक में प्रमुख सचिव लोक निर्माण नरेंद्र भूषण, सचिव लोक निर्माण अजय चौहान, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, विजय किरन आनंद, सचिव नगर विकास रंजन कुमार समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
घर घर लागू होगा किचेन गार्डन फार्मूला, कुपोषण दूर करेगी पोषण वटिका
कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित किए गए किचेन गार्डन मॉडल को घर घर तक पहुंचाने की योजना पर तेजी से काम शुरू होगा। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित किए गए इस मॉडल को आम जन तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग तेजी से योजना चलाने जा रहा है। मुख्य सचिव ने भी कहा है कि मॉडल को नए भवन निर्माणों में भी लागू करें ताकि लोगों को ताजी सब्जियां मिल सकें और कुपोषण को भी दूर किया जा सके।
कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) ने किचेन गार्डन का मॉडल विकसित किया है। किसी भी व्यक्तिगत, सरकारी स्कूल, सरकारी भवन आदि में यदि सौ गज जगह है तो यह मॉडल लागू किया जा सकता है। इसमें सब्जियां उगाने के लिए केवीके ही प्रोत्साहित करता है। यहां तक कि इस मॉडल पर काम करने वाले व्यक्ति को रबी, खरीफ और जायद में उगाई जाने वाली सब्जियों के बीजों की मिनी किट केवीके मुफ्त दे रहा है। खास तौर पर महिलाओं को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसे पोषण वाटिका नाम दिया गया है। इस वाटिका में लौकी, तौरी, भिंडी, मूली, शलजम, गाजर, टमाटर जैसी सब्जियां तो होती ही हैं साथ ही कुछ पेड़ अमरूद और पपीते के भी लगाए जाते हैं। यह वाटिका पूरे साल काम करती है।
कुपोषण दूर करने की मुहिम
मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने इस बाबत निर्देश दिए हैं। कहा है कि इस पद्घति से लोगों को घर पर ही आसानी से ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल सकती हैं। साथ ही कुपोषण दूर करने में भी यह फार्मूला काम करेगा। जहां-जहां सरकारी बिल्डिंग बनाई जा रही है वहां पर बेहतर टेक्नोलॉजी के साथ इस पर काम करने को कहा गया है।
उन्होंने बाल विकास विभाग की टेक होम राशन (टीएचआर) के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में 6 से 36 महीने की उम्र वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को घरेलू इस्तेमाल के लिए पौष्टिक पुष्टाहार मुहैया कराने को कहा है। इसी अभियान में पोषण वाटिकाएं बनाने के लिए आम लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
कई कई परिवार भी कर सकते हैं काम
ऐसी जगह में कई कई परिवार भी मिलकर काम कर सकते हैं। एक पोषण वाटिका वैसे तो पांच यह छह सदस्यीय परिवार को पूरे साल ताजी सब्जियां मुहैया कराती है पर यदि छोटा परिवार है तो कई कई परिवार भी इस पर काम कर सकते हैं। कृषि वैज्ञानिक डा. संदीप चौधरी कहते हैं इसमें आंवला आदि भी लगाया जा सकता है जो काफी पोषण देता है। इस पर तेजी से काम किया जा रहा है। सरकारी कार्यालय और आवास आदि में यह बेहतर विकल्प है।