मुख्यमंत्री योगी ने बीते दिनों शासन, जोन, मंडल, रेंज और जिला स्तर के अधिकारियों के साथ जनशिकायतों की मेरिट आधारित त्वरित समाधान की समीक्षा की थी। समीक्षा में सामने आया था कि जिलों से लेकर विभिन्न स्तरों तक शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही, हीलाहवाली और टरकाने की प्रवृत्ति चल रही है।
जनता से जुड़ी समस्याओं के समाधान और शिकायतों के निस्तारण में हीलाहवाली, लेटलतीफी करने और शिकायतकर्ता को टरकाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता की संतुष्टि ही अधिकारियों के कार्य का मानक मानी जाएगी। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण ही प्रमोशन का आधार और लापरवाही कार्रवाई का कारण बनेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसके लिए 20 सूत्रीय चेकलिस्ट जारी की है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों शासन, जोन, मंडल, रेंज और जिला स्तर के अधिकारियों के साथ जनशिकायतों की मेरिट आधारित त्वरित समाधान की समीक्षा की थी। समीक्षा में सामने आया था कि जिलों से लेकर विभिन्न स्तरों तक शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही, हीलाहवाली और टरकाने की प्रवृत्ति चल रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने रैंडम गुणवत्ता परीक्षण में खराब निस्तारण मिलने पर पहली बार आईजीआरएस के माध्यम से स्पष्टीकरण लेने और स्पष्टीकरण के संतोषजनक न होने पर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया है।
चलताऊ टिप्पणी नहीं चलेगी, लगेगी रोक
सीएम कार्यालय ने पाया है कि शिकायतों के निस्तारण में संबंधित अधिकारी की ओर से फाइल पर अक्सर चलताऊ टिप्पणी कर दी जाती है। अंतरिम आख्या या कार्यवाही के लिए संबंधित को निर्देशित कर दिया गया है, पात्रता की जांच की जा रही है, आवेदक को कार्यालय में उपस्थित होकर अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है, कार्य शीघ्र करा दिया जाएगा, जांच अधिकारी नामित है, जांच चल रही है, संबंधित से आख्या मांगी गई है और आवेदक की ओर से पत्र प्रस्तुत करने पर गुणदोष के आधार पर कार्यवाही की जाएगी जैसे टिप्पणी लिख दी जाती है। इस तरह की टिप्पणी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।