कई शिक्षकों ने बताया कि अनुबंध पर रखे जाने वाले शिक्षकों को प्राइवेट प्रैक्टिस पर छूट है जबकि नियमित शिक्षक होने पर निजी प्रैक्टिस (बाहर मरीज देखने) पर रोक है। असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में करीब 1.20 लाख रुपये प्रतिमाह मिलता है, जो काफी कम है। दो से तीन साल में तबादला भी हो जाता है। समयवद्ध तरीके से पदोन्नति नहीं होती है।
शिक्षकों के नहीं मिलने की यह भी वजहें
नाम नहीं छापने की शर्त पर चिकित्सा शिक्षकों ने बताया कि वे चिकित्सा शिक्षक सिर्फ सम्मान को ध्यान में रखकर बनते हैं। चिकित्सा शिक्षक की प्राथमिकता सिर्फ नौकरी नहीं होती है बल्कि सम्मान होता है, लेकिन नौकरशाही उन्हें निशाना बनाती है। कॉलेजों में संसाधनों का अभाव, शोध के लिए माहौल की कमी, परिवार के लिए अनुकूल माहौल न होना आदि का सामना करना पड़ता है। शिक्षकों को कार्य और उपचार के अलावा ढेर सारे काम करने पड़ते हैं। क्योंकि मेडिकल कॉलेजों में बिजली, फायर सर्विस, सीवर निगरानी सहित अन्य संसाधनों को लेकर कोई काडर नहीं है। किसी अप्रिय घटना होने पर कार्रवाई तय है। मेडिकल कॉलेज की नौकरी छोड़कर निजी अस्पताल शुरू करने वाले कई डॉक्टरों ने बताया कि कॉलेजों में निरीक्षण के दौरान छोटी-छोटी बात पर अधिकारियों की फटकार मिलती है। जबकि डॉक्टर का पेशा ऐसा है, जहां भी वह बैठ जाए, मेडिकल कॉलेज से मिलने वाली तनख्वाह से ज्यादा आमदनी कर सकता है। ऐसे में जब उसे फटकार मिलती है तो वह निजी क्षेत्र का रुख करने के लिए विवश हो जाता है।
प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों के खाली पदों को भरने के लिए प्रधानाचार्यों एवं संस्थानों के निदेशकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। तीन दिन पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में खाली पदों को लेकर बैठक हुई और कॉलेजवार समीक्षा भी की गई। चार सितंबर को विशेष सचिव कृतिका शर्मा ने सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, संस्थानों के निदेशकों और कुलपति को निर्देश दिया गया है कि हर 15 दिन पर शासन को अवगत कराया जाए कि कितने पद भरे गए।
जहां भी पद खाली हैं, उसका विज्ञापन जारी कर दिया गया है। लगातार कॉलेजों में साक्षात्कार भी चल रहे हैं। एमबीबीएस की सीटों के आधार पर चिकित्सा शिक्षक मौजूद हैं। अन्य खाली पदों को भी जल्द ही भर लिया जाएगा। जहां आयोग से चिकित्सा शिक्षक आने में देरी हो रही है, वहां वैकल्पिक रास्ते अपनाकर खाली पदों को भरा जा रहा है। चिकित्सा शिक्षकों की हर सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। जहां कॉलेज बढ़े हैं, वहां सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं ताकि चिकित्सा शिक्षकों को किसी तरह की समस्या न हो।- ब्रजेश पाठक, उप मुख्यमंत्री