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UP: उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म किये जाने पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई आपत्ति, कहा- ये संविधान के खिलाफ

Wed, 04 Feb 2026 07:08 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Madrasa Board in Uttarakhand: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में मदरसा बोर्ड खत्म करने का फैसला किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के चेयरमैन ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। 
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मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने जताया कड़ा ऐतराज। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को खत्म करने के फैसले पर उलमा सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के फैसले को कानून और देश के संविधान के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य एवं इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने उत्तराखंड सरकार के फैसले को अफसोसनाक बताते हुए इसे देश के कानून और संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 13 में अल्पसंख्यकों को अल्पसंख्यक संस्थान स्थापित करने और उसे संचालित करने का अधिकार दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट के भी इस संबंध में कई फैसले मौजूद है। इसके अलावा बीती जनवरी माह में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को लेकर फैसला दिया है कि मुसलमान इन मदरसों को संचालित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार को अपना फैसला लेना चाहिए।
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ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने उत्तराखंड सरकार के फैसले की निंदा करते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी मुसलमानों के एक हाथ में कुरान और एक हाथ में लैपटाप की बात कर रहे हैं।

सबका साथ, सबका विकस की बातें कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मदरसों को लगातार टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मदरसों ने देश को आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर, डाक्टर, मंत्री दिए हैं। देश की आजादी में मदरसों ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं। ऐसे में मदारिसे अरबिया पर कार्यवाही मुनासिब नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से अपना फैसला वापस लेने की मांग की।
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