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Lucknow: नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की करने पहुंची टीम, अफरातफरी, भुगतान न करने का है मामला

Tue, 10 Mar 2026 11:30 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की करने टीम पहुंची तो अफरातफरी मच गई। ये कार्रवाई शेल्टर होम चलाने वाली संस्था को भुगतान न करने के मामले में की गई।
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कुर्की करने पहुंची टीम। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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गृहकर का बकाया जमा न करने पर नगर निगम आए दिन बकायेदारों के खिलाफ कुर्की और सीलिंग की कार्रवाई करता है। उसी नगर निगम के नगर आयुक्त के कार्यालय में मंगलवार को ठेकेदार के बिल का भुगतान न करने पर कुर्की की कार्रवाई हुई। इस दौरान अफरातफरी का माहौल रहा। यह मामला मात्र 2.17 लाख रुपये के बकाया भुगतान का था। कार्रवाई करने पहुंची टीम ने कुर्सी, मेज, इन्वर्टर आदि निकाल लिए थे, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण वह कोई सामान नहीं ले सकी।

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कोर्ट के आदेश पर कुर्की के लिए पुलिस और तहसील की टीम के साथ ठेकेदार विकास तिवारी अपने अधिवक्ताओं के साथ करीब तीन बजे लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। टीम प्रथम तल पर स्थित नगर आयुक्त गौरव कुमार के कार्यालय पहुंची तो देखा वह कार्यालय में नहीं थे। टीम ने कार्यालय में लोगों के बैठने के लिए रखी कुर्सियां, बेंच, इन्वर्टर आदि निकाल लिए। पहले तो कार्यालय स्टाफ कुछ समझ नहीं सका। बाद में उन्होंने विरोध करते हुए दरवाजा अंदर से बंद कर अधिकारियों को फोन पर जानकारी दी। तुरंत डूडा प्रभारी एसीएम चंद्रकांत त्रिपाठी मौके पर पहुंचे, क्योंकि यह मामला डूडा से ही जुड़ा था। टीम के साथ उनकी बहस भी हुई। उनका कहना था कि कोर्ट का आदेश एक्स पार्टी हुआ है जिसमें उनका पक्ष सुना ही नहीं गया है।

कुर्की के आदेश के खिलाफ उनकी ओर से अपील भी की गई है। हालांकि, ठेकेदार के अधिवक्ताओं ने कहा कि मात्र अपील से कार्रवाई नहीं रुक सकती। कार्रवाई रोकने के लिए स्टे आर्डर चाहिए। इस बहस के बीच मौके पर भीड़ बढ़ने लगी तो तहसील अमीन और पुलिस टीम बिना कुछ लिए 15 दिन बाद वापस आने की बात कहकर निकल गई।

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इस मामले में हुआ कुर्की का आदेश
कुर्की की कार्रवाई गंगा संस्थान नामक ठेकेदार फर्म को 2.17 लाख रुपये का भुगतान न करने के कारण हुई है। ठेकेदार विकास तिवारी के वकील विवेक मिश्रा ने बताया कि नगर निगम ने वर्ष 2017 में गंगा संस्थान को कैसरबाग में चकबस्त शेल्टर होम चलाने का ठेका पांच वर्ष के लिए दिया था। इसका समय-समय पर नवीनीकरण भी होना था। पहली बार एक वर्ष, दूसरी बार छह महीने और तीसरी बार तीन महीने का कार्यादेश दिया गया।

जून में 2019 में तीन महीने का समय बढ़ाने का आवेदन किया गया। दिसंबर में नगर निगम ने जानकारी दी कि नवीनीकरण सितंबर में निरस्त किया जा चुका है। ऐसे में करीब चार महीने का पैसा ठेकेदार को नहीं दिया जाएगा। भुगतान पाने के लिए ठेकेदार ने तीन वर्ष तक प्रयास किया। अंत में उन्होंने 2022 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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2025 में सिविल जज ने नगर आयुक्त को हाजिर होने और न आने पर गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया था। इसके बाद भी निगम प्रशासन ने 2.17 लाख का भुगतान नहीं किया जो अब बढ़कर करीब 2.37 लाख हो गया है। बीती पांच फरवरी को अपर जिला जज जूडिशियल ने कुर्की का आदेश जारी किया, जिसमें अमीन और पुलिस को कुर्की के लिए निर्देश दिए।

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