एमएसएमई, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने सोमवार को खादी भवन में विभागीय कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उद्यमियों ने किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में जिस उद्यम की स्थापना के लिए भूमि ली है, वहां वही उद्यम स्थापित होना चाहिए। उन्होंने विभागों के दो वर्ष में किए गए कार्यों का ब्यौरा और निदेशालयों की स्टेटस रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। प्रदेश में प्रस्तावित टेक्सटाइल्स पार्क की स्थापना का कार्य 100 दिन के अंदर शुरू कर दिया जाए।
सचान ने कहा कि प्रदेश में कृषि के बाद एमएसएमई में रोजगार की सर्वाधिक संभावनाएं हैं। इसके लिए औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन को बढ़ाने और नए उद्यमों के स्थापना के लिए तेजी से कार्य किया जाए। सभी अधिकारी व कर्मचारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मिशन मोड में कार्य करें। उद्यमिता विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि लखनऊ में स्थापित उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन के नए पाठ्यक्रमों को यथाशीघ्र अनुमोदित कराया जाए।
मंत्री ने प्रदेश में एक्सप्रेसवे के पास एमएसएमई के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के निर्देश दिए। यह भी कहा कि शहरों में खादी विभाग की भूमि खाली पड़ी है, वहां खादी प्लाजा बनाया जाए। प्रदेश में रेशम की खपत के सापेक्ष उत्पादन बहुत कम है। इसलिए रेशम उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करें। इसके लिए तराई क्षेत्रों में किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में आयुक्त एवं निदेशक उद्योग मनीष चौहान, निदेशक रेशम नरेंद्र सिंह पटेल, विशेष सचिव हथकरघा शेषमणि पांडेय और विशेष सचिव एमएसएमई प्रदीप कुमार भी मौजूद रहे।
100 दिन बताई कार्ययोजना
अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई, रेशम, हथकरघा और खादी व ग्रामोद्योग नवनीत सहगल ने 100 दिन की कार्ययोजना के बारे में बताया। कहा कि अवस्थापना सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। ओडीओपी योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश में हथकरघा व वस्त्रोद्योग को बढ़ावा देने के लिए टेक्सटाइल्स पार्क विकसित करने का कार्यवाही की जा रही है। रेडीमेड गारमेंट के लिए फ्लैटेड फैक्टरी विकसित की जा रही है।