पांच ब्राह्मण प्रत्याशी उतारना आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि उस वर्ग तक संदेश पहुंचाने की कोशिश माना जा रहा है, जहां यूजीसी विवाद ने असंतोष पैदा किया था। खास बात यह है कि ये सीटें शिक्षक व स्नातक मतदाताओं से जुड़ी हैं, जिसकी यूजीसी विवाद में स्वाभाविक दिलचस्पी है। भाजपा इस समूह से संवाद कायम करना चाहती है। हालांकि, भाजपा टिकट बंटवारे को यूजीसी की प्रतिक्रिया नहीं मान रही है। इसलिए इसे प्रत्यक्ष कारण के बजाय राजनीतिक पृष्ठभूमि व संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा ने तीन ओबीसी, दो राजपूत और एक वैश्य प्रत्याशी के जरिये संकेत दिया है कि ब्राह्मण प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ ही पार्टी दूसरे वर्गों को नजरअंदाज नहीं करना चाहती। साफ है कि पार्टी की रणनीति किसी एक समूह पर निर्भर रहने के बजाय संतुलन बनाने की है।
माना जा रहा है कि भाजपा एमएलसी चुनावों के जरिये विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाज के हर वर्ग के साथ खड़े होने का सियासी संदेश देना चाहती है। चुनौती यही होगी कि टिकटों से दिया गया सामाजिक संदेश संगठन व स्थानीय स्तर पर प्रभावी संवाद में बदलता है या नहीं।