फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: 82 करोड़ के चिकित्सा उपकरणों की होगी जांच, महानिदेशालय और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका पर उठाया सवाल

Sat, 12 Sep 2026 08:50 AM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

उत्तर प्रदेश में अस्पतालों के लिए प्रस्तावित 82 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद से पहले विस्तृत जांच होगी। महानिदेशालय और आपूर्तिकर्ताओं के बीच संभावित सांठगांठ की भी जांच की जाएगी। राज्यसभा सदस्य की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्वास्थ्य विभाग को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। पहले खरीदे उपकरणों की स्थिति भी जांची जाएगी।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : i stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश के अस्पतालों के लिए 82 करोड़ की होने वाली उपकरण खरीद फंसती नजर आ रही है। खरीद से पहले इसकी विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में महानिदेशालय और आपूर्तिकर्ताओं की सांठगांठ को भी देखा जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को आदेश दिया है।

विज्ञापन


प्रदेश में उच्चीकृत अस्पतालों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 82 करोड़ के उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसके लिए महानिदेशालय से 20 अगस्त 2026 को शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव पर राज्यसभा सदस्य सीमा द्विवेदी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने महानिदेशालय और आपूर्तिकर्ताओं के बीच साठगांठ की आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। 

राज्यसभा सदस्य ने यह भी मांग की है कि करीब 82 करोड़ के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाई जाए। पूरे मामले की जांच चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित कर कराई जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष को पत्र भेजकर पूरे मामले में जांच कराने और उसकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन


 

Trending Videos

इन बिंदुओं की जांच की मांग

राज्यसभा सदस्य सीमा द्विवेदी ने महानिदेशालय स्तर पर गठित समिति में शामिल अधिकारी के नाम पदनाम और शैक्षिक व तकनीकी योग्यता की जांच कराने की मांग की है। इसी तरह महानिदेशालय में पिछले दिनों एक लिपिक के हटाने के मामले की भी जांच कराने की मांग की गई है।

इसमें बताया गया है कि उपकरणों खरीद से जुड़ा लिपिक की विभागीय अधिकारियों एवं ठेकेदारों/ आपूर्तिकर्ताओं के मध्य करोड़ों के प्रस्तावों एवं क्रय से संबंधित सौदे कराने की शिकायतें प्राप्त होती रही हैं। फिर अचानक इस लिपिक को हटाने के मामले की भी जांच की जाए।
विज्ञापन

पहले खरीदे गए उपकरणों का भी मांगा ब्यौरा

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में यह भी मांग की गई है कि पूर्व में खरीदे गए उपकरणों की भी जांच कराई जाए। इसमें यह पूछा जाए कि इससे पहले खरीदे गए उपकरणों की स्थिति क्या है? वे कार्य कर रहे हैं अथवा नहीं। यदि कोई उपकरण निष्प्रयोज्य है तो उसे किसने घोषित किया ? निष्प्रयोज्य उपकरणों की नीलामी कब हुई? प्राप्त धनराशि राजकोष में जमा कराई गई तो उसकी रसीद दी जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें