बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ में पार्टी की ऑल-इंडिया स्तर की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए संगठन को मजबूत करने और ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी का रुख साफ करने संबंधी निर्देश जारी किए। बैठक के दौरान उन्होंने पिछले कार्यों की समीक्षा की और सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को कमियों को दूर कर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी।
कांशीराम जी के संघर्षों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन मूवमेंट का मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए सत्ता हासिल करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर दिए गए बयानों का संज्ञान लेते हुए मायावती ने संघ की कथनी और करनी में भारी अंतर का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समानता के लिए आजीवन संघर्ष किया, जबकि आरक्षण, मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक वर्गों की सुरक्षा और महिला अधिकारों के मामलों में आरएसएस के दावों में सच्चाई की कमी दिखती है। उन्होंने संघ को सलाह दी कि वह खुद भी बाबा साहेब के मानवतावादी व समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करे और अपने लोगों से भी इसका पालन करवाए।