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UP: छठवीं पास ने पढ़े-लिखे अमेरिकी नागरिकों को लगाया करोड़ों का चूना, लखनऊ में बैठकर विदेशियों को लूटते थे

Sat, 18 Jul 2026 07:46 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ में चल रहे अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा करते हुए पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। कम पढ़े-लिखे आरोपी अमेरिकी नागरिकों को झांसा देकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करते थे। ठगी की रकम गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए भारत पहुंचाई जाती थी।

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लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने अमेरिकी नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले एक और अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। सुशांत गोल्फ सिटी स्थित ओमेक्स आर-2 रेजिडेंशियल अपार्टमेंट में संचालित इस कॉल सेंटर से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 

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हैरानी की बात यह है कि गिरोह के सरगना पुनीत कुमार वर्मा महज छठवीं और उसका साथी दीपेन चंद्रकांत पटेल आठवीं तक पढ़े हैं, लेकिन दोनों मिलकर विदेशी नागरिकों को झांसे में लेकर लाखों-करोड़ों रुपये की साइबर ठगी कर रहे थे।



 

कोई भी 12वीं से ज्यादा नहीं पढ़ा

पकड़े गए गिरोह में कोई भी 12वीं से ज्यादा नहीं पढ़ा है। पूछताछ में पुनीत ने बताया कि गिरोह में कम पढ़े-लिखे लोगों को ही शामिल किया जाता था। इन्हें रहने-खाने की व्यवस्था के साथ 35 हजार रुपये वेतन मिलता था। गिरोह में शामिल करने के लिए ऐसे लोगों का चयन होता था, जो बीपीओ के क्षेत्र में काम कर चुके हों और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हों। किसी को भी नियुक्ति पत्र या कोई दस्तावेज नहीं दिया जाता था। पूरा पैटर्न समिट बिल्डिंग में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर की तरह था। 

आरोपी ठगी की रकम सीधे बैंक खातों में नहीं लेते थे। सारा लेनदेन गिफ्ट कार्ड, डिजिटल वाउचर और क्रिप्टोकरेंसी के जरिये होता था। ऐसा करने का उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत एवं अंतिम लाभार्थी के साथ जांच एजेंसियों के लिए वित्तीय ट्रेल को छिपाना था।

 

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हवाला से 70 फीसदी रकम भेजते थे अमेरिकी ठग

आरोपियों ने बताया कि अमेरिका में बैठे गिरोह के साथी 30 फीसद रकम अपने पास रखते थे। 70 प्रतिशत रकम हवाला के जरिये भारत भेजी जाती थी। हवाले की रकम ठिकाने लगाने और कर्मचारियों को बांटने का काम गुजरात में रहने वाला पुनीत का बड़ा भाई यश करता था। 

वहीं, अमेरिकी ठगों से संपर्क में रहता था। पुलिस यश का पता लगा रही है। आरोपियों के पास से इंटरनेट आधारित कॉलिंग सॉफ्टवेयर, आईबीम डायलर, कॉलिंग स्क्रिप्ट, विदेशी नागरिकों का डाटा, ई-मेल टेम्पलेट, फर्जी सरकारी दस्तावेज, नकली कोर्ट ऑर्डर, आठ लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल सामग्री मिली है। बरामद सामग्री को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। डीसीपी क्राइम ने गिरोह को पकड़ने वाली टीम को 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
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