कोई भी 12वीं से ज्यादा नहीं पढ़ा
पकड़े गए गिरोह में कोई भी 12वीं से ज्यादा नहीं पढ़ा है। पूछताछ में पुनीत ने बताया कि गिरोह में कम पढ़े-लिखे लोगों को ही शामिल किया जाता था। इन्हें रहने-खाने की व्यवस्था के साथ 35 हजार रुपये वेतन मिलता था। गिरोह में शामिल करने के लिए ऐसे लोगों का चयन होता था, जो बीपीओ के क्षेत्र में काम कर चुके हों और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हों। किसी को भी नियुक्ति पत्र या कोई दस्तावेज नहीं दिया जाता था। पूरा पैटर्न समिट बिल्डिंग में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर की तरह था।
आरोपी ठगी की रकम सीधे बैंक खातों में नहीं लेते थे। सारा लेनदेन गिफ्ट कार्ड, डिजिटल वाउचर और क्रिप्टोकरेंसी के जरिये होता था। ऐसा करने का उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत एवं अंतिम लाभार्थी के साथ जांच एजेंसियों के लिए वित्तीय ट्रेल को छिपाना था।
हवाला से 70 फीसदी रकम भेजते थे अमेरिकी ठग
आरोपियों ने बताया कि अमेरिका में बैठे गिरोह के साथी 30 फीसद रकम अपने पास रखते थे। 70 प्रतिशत रकम हवाला के जरिये भारत भेजी जाती थी। हवाले की रकम ठिकाने लगाने और कर्मचारियों को बांटने का काम गुजरात में रहने वाला पुनीत का बड़ा भाई यश करता था।
वहीं, अमेरिकी ठगों से संपर्क में रहता था। पुलिस यश का पता लगा रही है। आरोपियों के पास से इंटरनेट आधारित कॉलिंग सॉफ्टवेयर, आईबीम डायलर, कॉलिंग स्क्रिप्ट, विदेशी नागरिकों का डाटा, ई-मेल टेम्पलेट, फर्जी सरकारी दस्तावेज, नकली कोर्ट ऑर्डर, आठ लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल सामग्री मिली है। बरामद सामग्री को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। डीसीपी क्राइम ने गिरोह को पकड़ने वाली टीम को 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।