हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी से गुम हुए नाबालिग बच्चों के मामलों में लचर तफ्तीश पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने लखनऊ के सभी थानों से संबंधित ऐसे गुमशुदगी के मामलों में पुलिस कमिश्नर से 10 जून को स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही पुलिस उपायुक्त (डी सी पी) दीक्षा शर्मा को निर्देश दिया थाकि वे ऐसे केसों की निगरानी कर रिपोर्ट पेश करें।
इसके तहत, बुधवार को अदालत को बताया गया कि 1 जनवरी2026 से अब तक कुल 261 लोग लखनऊ से गुम हुए हैं। इनमें अधिकांश नाबालिग लड़के व लड़कियां हैं। इनमें 227 का पता लगाकर बरामद कर लिया गया है। जबकि, 34 अभी भी लापता हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाकर इन लापता लोगों के मामलों की साप्ताहिक निगरानी करने के निर्देश दिए और 3 जुलाई की निगरानी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा जब राजधानी में गुमशुदा लोगों की तलाश मामले में यह हाल है, तो ने जिलों की हालत समझी जा सकती है। कोर्ट के आदेश पर लखनऊ के पूर्वी जो के डी सी पी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी समेत ऐसे मामलो के विवेचक भी पेश हुए। कोर्ट ने इन्हें फटकार लगाकर कहा कि ऐसे मामलों को विवेचना में सुस्ती, लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की अवकाश कालीन पीठ ने बुधवार को यह आदेश एक नाबालिग लड़की की और से उसके पिता द्वारा दाखिल याचिका पर दिया। याचिका में शहर से गुम हुई 12 साल की नाबालिग लड़की की तलाश करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
इस नाबालिग लड़की बरामदगी होने पर कोर्ट ने उसके पिता को सौंप दिया। पहले, सुनवाई के समय पेश हुईं डी सी पी दीक्षा शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया था कि उनकी अधिकारिता में आने वाले नौ थानों में से 81 लड़कियों ( जिनमें अधिकांश नाबालिग हैं), का या तो अपहरण हुआ या फिर वे बहला फुसलाकर भगा ले जाई गईं।
इनमें से 66 को बरामद कर लिया गया है, जबकि, 15 लड़कियां अभी भी गुम हैं। इसपर कोर्ट ने कहा था कि, मौजूदा मामले के अलावा शहर में अन्य और ऐसे मामले हो सकते हैं, जो पुलिस की जानकारी में नहीं होंगें। ऐसे में डी सी पी इन मामलों का पता लगाकर और इनकी निगरानी करके तीन दिन में रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 जून को पहले केस के रूप में निर्धारित करके डी सी पी को सभी संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारियों, प्रभारी निरीक्षकों समेत विवेचनाधिकारियों के साथपेश होने का निर्देश दिया था।