प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रीमियम जमा करना तो बेहद आसान है, लेकिन बीमा दावा (क्लेम) मिलना उतना ही कठिन। जिस खरीफ की फसल की कटाई पिछले साल सितंबर-अक्तूबर में हो चुकी है, उसके नुकसान का पैसा बृहस्पतिवार को किसानों के खाते में भेजा गया। वह भी यह राहत तब मिली है जब इस समय रबी की खड़ी फसल खराब मौसम की चपेट में आ गई।
इसी लेटलतीफी के चलते किसानों का योजना से मोहभंग हो रहा है। फसलों का बीमा कराने वाले किसानों की संख्या पिछले तीन सालों से लगातार कम हो रही है। कृषि सांख्यिकी एवं निदेशक फसल बीमा को इसके लिए लक्ष्य भी दिए गए हैं। फिर भी किसानों का आंकड़ा नहीं बढ़ रहा है।
ऐसे होता है फसल बीमा : सरकार ने बीमा को स्वैच्छिक कर दिया है। जिस किसान को बीमा नहीं चाहिए उसे निर्धारित तारीख से सात दिन पहले बैंक को सूचित करना होगा अन्यथा किसान के क्रेडिट कार्ड से फसल के हिसाब से प्रीमियम काट लिया जाएगा। जिसका कार्ड नहीं है और उसने कर्ज नहीं लिया है तो वह कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर बीमा करा सकता है।
ताजा सर्वे में 19 हजार से 83 हजार हो गए प्रभावित किसान
बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से हुए नुकसान के सर्वे में बृहस्पतिवार को 63,993 किसानों की संख्या बढ़ गई। अब 83 हजार से ज्यादा किसानों को फसलों के नुकसान पर मुआवजा मिलेगा। वाराणसी में अब तक सबसे ज्यादा 58,393 किसानों को नुकसान होना सामने आया है। हालांकि जिलों में सर्वे अभी जारी हैं। ऐसे में यह संख्या बढ़ सकती है। शासन ने राहत कार्याें को तेजी के निर्देश दिए हैं।बुधवार तक सर्वे में सामने आया था कि 19 हजार किसानों की फसलों को 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हुआ है।