शाहजहांपुर में ढहे कोलाघाट पुल की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। कमजोर बुनियाद पर ही करीब पौने दो किमी लंबा पुल बना दिया गया था। इसके कुएं (वेल) न सिर्फ झुके हुए मिले, बल्कि निर्धारित स्थान से हटे हुए थे। यह जांच केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) से कराई गई थी। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है।
शाहजहांपुर में कलान-मिर्जापुर क्षेत्र को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला 1800 मीटर लंबा कोलाघाट पुल पिछले साल नवंबर में पिलर धंसने से ढह गया था। करीब दो सौ मीटर हिस्सा जमींदोज होने से पुल तीन हिस्सों में बंट गया। रामगंगा और बैगुल नदी पर यह पुल 2009 में बनाया गया था। इतने कम समय में पुल का यह हश्र होने पर विशेषज्ञों की टीम से इसकी जांच कराई गई थी।
कोलाघाट पुल में कुल 59 वेल बनाए गए थे। इनमें से 15 की जांच सीआरआरआई ने की। उसने रिपोर्ट में कहा है कि अधिकांश वेल की बुनियाद (फाउंडेशन) निर्धारित मानक से ज्यादा झुकी और अपने स्थान से हटी हुई मिली। निर्माण के दौरान इस समस्या को दूर करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए।
विशेषज्ञों ने कहा है कि जिन 15 वेल की जांच की, उनमें से कोई भी उतना भार सहन करने के योग्य नहीं मिला, जितने के लिए वे डिजाइन किए गए। कुओं की फाउंडेशन पानी के क्षैतिज दबाव को सहन करने के लिहाज से असुरक्षित मिली। इसे इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) कोड के विपरीत बताया गया है। रिपोर्ट में सभी वेल को मजबूत किए जाने की आवश्यकता बताई गई है।
वहीं, सेतु निगम के सूत्रों का कहना है कि सीआरआरआई को जांच के लिए जितनी राशि दी गई थी, उससे 15 वेल की जांच ही हो सकती थी। अगर अन्य सभी वेल की जांच कराई जाए तो स्थिति और खराब मिलेगी। शेष वेल की जांच के लिए सीआरआरआई ने अतिरिक्त धन की मांग की है।
सीआरआरआई की 15 वेल की जांच रिपोर्ट अभी आई है। मामले में पहले से ही एक जांच कमेटी बनी हुई है। पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद इसे जांच कमेटी को सौंपा जाएगा। इसके बाद कार्रवाई के संबंध में कोई निर्णय लिया जा सकेगा।
- राकेश सिंह, एमडी, उप्र. राज्य सेतु निगम