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UP: चर्चा में निषाद... ऑफर की बहार; सपा से निषाद प्रत्याशी उतारने से भाजपा-सपा में इस वोटबैंक को लेकर खींचतान

श्रीनारायण मिश्र, अमर उजाला, सुल्तानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 02 May 2024 03:01 PM IST

सार

सुल्तानपुर सीट पर सपा से निषाद प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। निषाद प्रत्याशी के उतारने से भाजपा-सपा में इस वोटबैंक को लेकर खींचतान मच गई है। निषाद मतों में फिलहाल मजबूती से भीम तीसरा कोण बने हैं। मंत्री संजय निषाद भाजपा के लिए यह वोट साधने में जुटे हैं।
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भीम निषाद - फोटो : अमर उजाला
सियासत में जो शख्स या तबका हाशिये पर पड़ा है, वह कब अचानक हॉटकेक बन जाए यह भला कौन जानता है। जिले में निषाद मतदाताओं को देखकर तो यही लगता है। बरसों से भाजपा का वोट बैंक रहे इस समाज में सेंध लगाने के लिए जब सपा ने निषाद प्रत्याशी मैदान में उतारा तो अब इसी वोट बैंक के लिए दोनों दलों में रस्साकशी शुरू हो गई है।

जिले में निषाद मतदाताओं की संख्या करीब दो लाख मानी जाती है। ये पिछले एक दशक से सुल्तानपुर में भाजपा के परंपरागत वोटर बने हुए थे। इसके बावजूद इनकी अहमियत चुनाव में उतनी नहीं आंकी जाती थी। इनकी बजाय ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए ज्यादा प्रयास हुआ करते थे। 


पार्टियां इन्हीं तीन के इर्द-गिर्द जीत का ताना-बाना बुनती थीं। किंतु इस बार जब सपा ने पहले भीम निषाद को अपना प्रत्याशी घोषित किया तो अचानक इस समाज की ताकत का लोगों को एहसास हुआ।

करीब आठ महीने तक भीम निषाद अपनी बिरादरी के मतों को साधने में जुटे रहे, लेकिन अंतिम क्षण में सपा ने उनका टिकट काटकर पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद को थमा दिया। अब भाजपा के सामने इस मत को अपनी ओर आकर्षित करने की चुनौती खड़ी हो गई। 
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भीम निषाद - फोटो : अमर उजाला
सियासत में जो शख्स या तबका हाशिये पर पड़ा है, वह कब अचानक हॉटकेक बन जाए यह भला कौन जानता है। जिले में निषाद मतदाताओं को देखकर तो यही लगता है। बरसों से भाजपा का वोट बैंक रहे इस समाज में सेंध लगाने के लिए जब सपा ने निषाद प्रत्याशी मैदान में उतारा तो अब इसी वोट बैंक के लिए दोनों दलों में रस्साकशी शुरू हो गई है।

जिले में निषाद मतदाताओं की संख्या करीब दो लाख मानी जाती है। ये पिछले एक दशक से सुल्तानपुर में भाजपा के परंपरागत वोटर बने हुए थे। इसके बावजूद इनकी अहमियत चुनाव में उतनी नहीं आंकी जाती थी। इनकी बजाय ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम मतदाताओं को साधने के लिए ज्यादा प्रयास हुआ करते थे। 

पार्टियां इन्हीं तीन के इर्द-गिर्द जीत का ताना-बाना बुनती थीं। किंतु इस बार जब सपा ने पहले भीम निषाद को अपना प्रत्याशी घोषित किया तो अचानक इस समाज की ताकत का लोगों को एहसास हुआ।

करीब आठ महीने तक भीम निषाद अपनी बिरादरी के मतों को साधने में जुटे रहे, लेकिन अंतिम क्षण में सपा ने उनका टिकट काटकर पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद को थमा दिया। अब भाजपा के सामने इस मत को अपनी ओर आकर्षित करने की चुनौती खड़ी हो गई। 

कादीपुर व सुल्तानपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में निषाद मतों की संख्या सर्वाधिक मानते हुए सबसे ज्यादा ताकत वहीं लगाई जा रही है। उनके कल्याण की बातें भाजपा भी कर रही है।

शायद यही वजह है कि भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में भी निषाद पार्टी के मुखिया और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद शामिल हुए। इसके अलावा यहां पार्टी ने स्टार प्रचारक के तौर पर उनकी मांग रखी है। उधर, सपा प्रत्याशी भी निषाद समाज का हित बताते घूम रहे हैं। 

 

सपा के पूर्व प्रत्याशी भीम निषाद भी इस समाज में गहरे तक जड़ जमाए हुए हैं। इसी बूते वे भी नामांकन पत्र खरीदकर बैठे हैं। अब निषाद समाज का वोट कहां जाएगा? यह तो मतदान के दिन ही तय होगा, किंतु फिलहाल वह हर दल के लिए आकर्षण बना हुआ है। 

प्रमुख जातियों के अनुमानित वोटर

जाति वोटरों की संख्या
ब्राह्मण 2.60  
क्षत्रिय 1.50  
मुस्लिम 3.00  
यादव 1.65 
वर्मा 1.0 
वैश्य 1.00 
अनुसूचित जाति एवं जनजाति 3.0  
(आंकड़े प्रत्याशियों के सर्वे व चुनावी जानकारों के अनुसार लाख में।)
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