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UP: विधायकों के बगावती तेवर खिलाएंगे नया गुल, राज्यसभा चुनाव में बागी हुए थे दो MLA; अब क्या होगा उनका किरदार?

Sat, 27 Apr 2024 09:18 AM IST
शाहरुख खान नंदलाल तिवारी, अमर उजाला, अमेठी

सार

अमेठी में विधायकों के बाकी तेवर नया गुल खिलाएंगे। फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सहयोगी दल सपा के दो विधायकों ने बगावती तेवर अपनाए थे। अब उनका परिवार भाजपा में है।
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UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पांचवें चरण के चुनाव के लिए अमेठी संसदीय क्षेत्र में नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। सियासी रण में दलों के बीच रस्साकशी चल रही है। सहमति, असहमति, दावों के बीच राजनीतिक उधेड़बुन है। अमेठी सीट सपा-कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस के खाते हैं। वर्तमान में कांग्रेस का कोई विधायक जिले में नहीं है। 
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राजनीति का दिलचस्प पहलू यह है कि फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सहयोगी दल सपा के दो विधायकों ने बगावती तेवर अपनाए थे। इस चुनाव में अब उनका किरदार क्या होगा, इसको लेकर सियासी गलियारों में अटकलें बढ़ गई हैं। वैसे चुनाव में इन विधायकों का रुख सियासत में नया गुल खिला सकता है।
  • बात करते हैं अमेठी के गौरीगंज विधानसभा से। यहां के सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह अब तक तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। फरवरी में राज्यसभा चुनाव में क्राॅस वोटिंग के बाद वह सुर्खियों में आए। सरकार ने उन्हें वाईश्रेणी की सुरक्षा तक प्रदान की। हाल के दिनों में विधायक के भाई समेत उनका पूरा कुनबा भाजपा में शामिल हो गया। यहां यह बात अहम है कि परिवार के लोगों ने तो कमल का दामन थाम लिया, लेकिन विधायक की भूमिका को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
  • यही हाल अमेठी की सपा विधायक महाराजी को लेकर भी है। राज्यसभा चुनाव के समय बीमारी का हवाला देकर वोट न देने वाली विधायक ने सपा के कार्यक्रमों से दूरी बना ली है। चुनाव में किसके साथ रहेंगी, इसे लेकर सियासी गलियारे में नई बहस शुरू हो गई है।

सपा जिलाध्यक्ष राम उदित यादव कहते हैं कि गौरीगंज हो या अमेठी, दोनों विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में बगावत की थी। पार्टी के कार्यक्रमों से भी वह दूर हैं। अब वह क्या करेंगे, किसका साथ देंगे, हम नहीं बता सकते। हमारी पार्टी तो गठबंधन प्रत्याशी के समर्थन में पूरी तरह से तैयार है।

बीते संसदीय चुनाव में सिर्फ अमेठी में जीती थी कांग्रेस
वर्ष 2019 के चुनाव की बात करें तो अमेठी संसदीय सीट की पांच विधानसभाओं में कांग्रेस को सिर्फ अमेठी विधानसभा सीट पर महज 230 मतों से जीत मिली थी। अन्य विधानसभाओं में कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी। वह भी तब जब सपा ने उस वक्त भी कांग्रेस का साथ दिया था।

दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का नहीं खुला खाता
वर्ष 2017 के चुनावों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला। अमेठी जिले की चारों विधानसभा सीटों में से तीन भाजपा व एक पर सपा ने जीत दर्ज की थी। यही हाल वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव का भी रहा। दो विधानसभा सीटों पर भाजपा व दो पर सपा को जीत मिली।

सिर्फ दो बार ही सपा ने कांग्रेस के खिलाफ उतारे उम्मीदवार
1967 में बनी अमेठी लोकसभा सीट से सपा ने संसदीय चुनाव में सिर्फ दो बार ही उम्मीदवार उतारा। पहला 1998 के चुनाव में शिव प्रसाद को। इस चुनाव में भाजपा के संजय सिंह ने कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को हराया था। सपा को महज 29,888 वोट ही मिले थे।
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1999 के चुनाव में कांग्रेस की सोनिया गांधी ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में सपा ने कमरुज्मां फौजी को उतारा था। चौथे स्थान पर रहने वाली सपा को 16 हजार 678 वोट ही मिले थे। इसके बाद संसदीय चुनाव में सपा ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा।
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