तेंदुओं की नसबंदी का प्लान
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ये है समस्या की वजह
बिजनौर जिला राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास है। बाघों की संख्या बढ़ने के कारण तेंदुए गैर वन क्षेत्रों यानी गन्ने के खेतों की ओर स्थानांतरित हो गए हैं। बिजनौर में 49% क्षेत्र में तेदुओं को छिपने और प्रजनन की आदर्श जगह मिलती है। खेतों के पास पालतू पशुओं की उपलब्धता ने तेंदुओं के लिए भोजन की समस्या खत्म कर दी है। इसकी जनसंख्या में तेज वृद्धि हुई है।
446 में 326 गांव प्रभावित
बिजनौर के कुल 446 गांव में 326 गांव प्रभावित हैं। इनमें 40 गांव अत्यंत संवेदनशील और 80 गांव संवेदनशील हैं। वहीं, स्टाफ की कमी प्रबंधन की चुनौतियां पैदा कर रही है। बिजनौर में वन कर्मियों की स्वीकृत संख्या 326 है, जबकि इस समय 163 कर्मी तैनात हैं।
वाहन के सामने खड़ा तेंदुआ
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एक बार में तीन शावकों को देती हैं जन्म
वन विभाग के अनुसार, बिजनौर में इस समय 444 तेंदुए हैं। इनमें 222 मादा हैं और 111 वयस्क हैं। मादा तेंदुए का प्रजनन चक्र 2 साल का है। एक बार में मादा आमतौर पर तीन शावकों को जन्म देती है। एक नर तेंदुए के पीछे 1.5 मादा का अनुपात है।