ऊर्जा मंत्री आरके शर्मा ने बुधवार को विधानसभा में बिजली कंपनियों के निजीकरण के बारे में कहा कि इस फैसले में सरकार का कोई फिक्स एजेंडा नहीं है। यह जनता के हित के लिए किया जा रहा है। इसमें कर्मचारियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
वे सपा सदस्य सचिन यादव और संग्राम यादव द्वारा निजीकरण से बिजली कर्मचारियों के हितों के प्रभावित होने के बारे में पूछे प्रश्न का जवाब दे रहे थे। सपा सदस्य निजीकरण पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सपा सरकार बिजली विभाग पर 1.42 लाख करोड़ रुपये घाटा छोड़कर गई थी। हम इसे कम करने की कोशिश कर रहे हैंं। पिछली सभी सरकार के प्रयासों के बावजूद बिजली विभाग सही नहीं चल रहा है। नोएडा में राष्ट्रपति शासन में निजीकरण हुआ, सपा सरकार आने पर इसे वापस नहीं लिया गया। इसी तरह बसपा सरकार में आगरा में टोरेंट कंपनी को लाने का फैसला भी सपा सरकार ने वापस नहीं लिया।
पहले से बोये हुए कुछ बबूल
वहीं दूसरी ओर अल्प आय वर्ग को नए कनेक्शन देने और बिजली कर्मचारियों की मनमानी को लेकर सपा सदस्य महेंद्र नाथ यादव के सवाल पर ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिलों में गड़बड़ी की बात को मैं स्वीकार करता हूं। उन्होंने हैरानी जताई कि सख्त कार्रवाई के बाद भी इसमें सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग अब तक 3394 मीटर रीडरों की सेवाएं समाप्त कर चुका है। वहीं 28 पर एफआईआर कराई जा चुकी है। इसके अलावा 85 नियमित कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा कि पहले से बोये हुए कुछ बबूल की वजह से यह हालात हैं। वहीं सपा सदस्य स्वामी ओमवेश, महबूब अली और कांग्रेस सदस्य आराधना मिश्रा मोना द्वार पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विभाग ने गर्मी में बिजली आपूर्ति की मुकम्मल व्यवस्था कर ली है। सौर ऊर्जा समेत तमाम विकल्पों के जरिए उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है।