सभी राज्य कर्मियों का अवकाश संबंधी ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर 25 मार्च तक अपलोड करना होगा। इसे अपलोड करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों के आहरण-वितरण अधिकारी की होगी। इस संबंध में मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से कार्मिक विभाग ने शासनादेश जारी कर दिया है। शासनादेश में कहा गया है कि मानव संपदा पोर्टल पर शत-प्रतिशत कर्मचारियों व अधिकारियों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। अवकाश की स्वीकृति भी पोर्टल के माध्यम से ही सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जमीन में निवेश की पारदर्शी व्यवस्था लागू
प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के शेयर और जमीन आदि में निवेश की पारदर्शी व्यवस्था लागू कर दी है। अब अगर कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना अपने समुचित प्राधिकारी को देनी होगी। दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की कोई चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी।
इस संबंध में प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने शासनादेश जारी कर दिया है। इसे मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई थी। अब हर वर्ष सभी कार्मिकों को अपनी अचल संपत्ति की भी जानकारी देनी होगी।
सिविल जज पदोन्नति संबंधी शासनादेश भी जारी
इसी तरह उच्च न्यायालय की संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली, 2026 संबंधी शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। इसे भी मंगलवार को कैबिनेट ने हरी झंडी दी थी। नई व्यवस्था के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।
सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिये पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें वही सिविल जज शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने उस पद पर कम से कम तीन साल की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कम से कम सात साल की सेवा पूरी की हो। इसके अलावा अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा।