पर्यटन का विस्तार अब बड़े धार्मिक शहरों से आगे छोटे शहरों और अन्य गंतव्यों तक भी दिखाई दे रहा है। विभागीय फुटफॉल आंकड़ों के अनुसार चित्रकूट में पर्यटकों की संख्या 2024 में 1.18 करोड़ से बढ़कर 2025 में 3.65 करोड़ हो गई। इसी अवधि में मिर्जापुर में पर्यटकों की संख्या 1.41 करोड़ से बढ़कर 2.10 करोड़ दर्ज की गई। इन आंकड़ों के साथ प्रदेश में ऐसे स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता देने की कोशिश हो रही है, जहां धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के साथ स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक आकर्षण मौजूद हैं।
ग्रामीण पर्यटन को भी इस विस्तार का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। प्रदेश के 230 से अधिक चयनित गांवों में ग्रामीण पर्यटन की पहल के तहत होमस्टे, स्थानीय खानपान और पारंपरिक हस्तशिल्प को पर्यटकों के अनुभव से जोड़ा जा रहा है। वहीं ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में 2026 में वाराणसी के सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना उत्तर प्रदेश की बौद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यूनेस्को ने जुलाई माह में सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया।
अपर मुख्य सचिव पर्यटन व संस्कृति विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि प्रदेश में अब अकेले यात्रा करने वाले पर्यटकों और महिलाओं के समूहों यानी ग्रुप ऑफ गर्ल्स पर्यटन को भी प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए व्यवस्थित अनुभव, भरोसेमंद ठहरने की सुविधाएं और पर्यटकों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रमुख पर्यटन स्थलों को आसपास के विरासत स्थलों, स्थानीय खानपान और गांवों की परंपराओं से जोड़ा जाए तो पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ सकती है और इसका लाभ स्थानीय कारोबारियों तक भी पहुंच सकता है।
युवाओं को पर्यटन और स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के लिए ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके जरिए युवाओं को अपने आसपास के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को देखने, समझने और उनकी जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। दीपोत्सव, देव दीपावली और ब्रज रंगोत्सव जैसे बड़े आयोजन पहले से ही पर्यटन को सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ रहे हैं। इसी कड़ी में अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी में कला कार्यशालाओं की भी योजना है। लखनऊ के ‘लोकधारा’ कला शिविर में विशेषज्ञों और पद्म पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों की भागीदारी प्रस्तावित है, जिससे विद्यार्थियों और युवा कलाकारों को स्थापित कलाकारों से सीधे सीखने का अवसर मिल सके।
अमृत अभिजात ने बताया कि इसका उद्देश्य युवाओं को अपनी परंपराओं को समझने और उन्हें आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका देना है, ताकि वे अपने शहरों और जिलों की संस्कृति के प्रतिनिधि बन सकें। इस तरह प्रदेश की पर्यटन रणनीति में एक तरफ बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के जरिए पहुंच आसान बनाने पर जोर है, तो दूसरी तरफ तीर्थ स्थलों के साथ विरासत, गांव, प्रकृति, कला, स्थानीय खानपान और सांस्कृतिक आयोजनों को जोड़कर पर्यटन का अनुभव व्यापक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।