350 करोड़ की फंसी योजना का रास्ता साफ
परिषद सचिव ने बताया गाजियाबाद की वसुंधरा योजना- तीन करीब 15 साल पुरानी है। जमीन लेते समय किसानों को बोर्ड ने 25 से 50 वर्ग मीटर का भूखंड देने का प्रस्ताव पास किया गया था। जिसके बाद उस समय सभी 217 किसानों को 25 वर्ग मीटर के ही भूखंड आवंटित किए गए जिसको लेकर किसान पिछले 12 साल से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इससे परिषद की योजना में फंसी थी। अब बोर्ड ने सभी 35 वर्गमीटर का भूखंड देने का प्रस्ताव पास किया है। इससे परिषद की करीब 350 करोड़ रुपये की फंसी जमीन भी बाहर आ जाएगी और योजना का शुरू किया जा सकेगा।
ई-नीलामी में बदलाव, नहीं बढ़ेंगी हर बार कीमत
परिषद ने उन संपत्तियों के मामले में नियम सरल किया जो बोली में उच्च कीमत आने के बाद बिक नहीं रहीं थी। उप आवास आयुक्त पल्लवी ने बताया कि कई बार लोग ई नीलामी में संपत्तियों की बोली इतनी अधिक लगा देते हैं और खरीदते नहीं हैं। ऐसे में वह फंसा देते थे। यह संपत्तियों जब पिछली बोली के आधार पर दोबारा नीलामी में लगाई जाती थीं तो फिर उतनी बोली आती नहीं थी।
ऐसे में यह सपंत्तियां बिक नहीं पा रही हैं। लखनऊ, कानपुर सहित अन्य शहरों में करीब 50 संपत्तियों फंसी हैं। अब बोर्ड ने यह तय किया है कि दो बार और नीलामी लगाने के बाद यदि पुरानी कीमत नहीं आई तो फिर कीमत को परिषद के रेट के आधार पर नीलामी में लगाया जाएगा।