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UP: आवास विकास परिषद की आईटी सिटी योजना में कम हुए जमीन के रेट...दो साल में आएंगी पांच शहरों में योजनाएं

Fri, 26 Dec 2025 10:16 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

आवास विकास परिषद की आईटी सिटी योजना में जमीन के रेट घटाए गए हैं। नई गणना नीति से पुरानी और नई योजनाओं की जमीन करीब 25% सस्ती होगी। 
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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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लखनऊ में आवास विकास परिषद की वृंदावन योजना में करीब 256 एकड़ में विकसित की जा रही आईटी सिटी में जमीन के रेट कम हो गए हैं। शुक्रवार को हुई आवास विकास परिषद बोर्ड में यह प्रस्ताव पास कर दिया। नई गणना नीति को भी बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है। जिससे अब पुरानी और नई योजनाओं भी जमीन के रेट करीब 25 प्रतिशत तक कम हो जाएंगे।
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बोर्ड में पास हुए प्रस्तावों की जानकारी देते हुए आवास विकास परिषद के सचिव नीरज शुक्ला ने बताया कि अभी आईटी सिटी में जमीन की कीमत आवासीय की डेढ़ गुना थी जो अब एक गुना यानि आवासीय दर पर कर दी गई है। जो 10 एकड़ से अधिक जमीन खरीदेंगे उनको आवासीय से 0.9 प्रतिशत कम कीमत पर जमीन मिलेगी। 

उप आवास आयुक्त पल्लवी मिश्रा ने बताया कि आईटी के लिए चार बार निविदा निकाली गई मगर कोई खरीदार नहीं आया। ऐसे में जमीन की कीमत को बोर्ड ने कम कर दिया है। उप आवास आयुक्त चंदन पटेल ने बताया कि आईटी सिटी योजना में आवासीय जमीन का रेट अभी करीब 38 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है। 
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करीब 25 प्रतिशत तक कम हो जाएगी...

डेढ़ गुना पर यह करीब 58 हजार रुपये प्रतिवर्ग मीटर हो जा रही थी, जिसे अब कम किया गया है। नई गणना नीति से अब पुरानी योजनाओं की उन संपत्तियों की कीमत करीब 25 प्रतिशत तक कम हो जाएगी जो कई साल से बिक नहीं रहीं थी। 

इसके लिए पहले संपत्तियों को निष्प्रयोज्य घोषित किया जाएगा उसके बाद उसके रेट कम किए जाएंगे। जो नई योजनाओं आ रही हैं उनमें कई तरह का जो अतिरिक्त शुल्क लिया जाता था उसको कम किया जाएगा। उसमें पार्क फेसिंग भूखंड पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को कम करके 10 की बजाए 05 प्रतिशत कर दिया गया है। सेंटेज को भी 20 से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। अन्य मदों में कमी आएगी। इससे जमीन की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक कम हो जाएंगी।

सशत्र सेनाओं और अद्धसैनिक बलों को फ्लैट खरीद पर मिलेगी 20 प्रतिशत की छूट

परिषद के सचिव नीरज शुक्ला ने बताया कि पहले आओ पहले पाओ योजना के तहत अभी 60 दिन में फ्लैट की कीमत का भुगतान करने पर 15 प्रतिशत की छूट सभी को दी जाती है लेकिन अब सशत्र बलों और अर्द्धसैनिक बलों के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों को 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। जो 61 से 90 दिन में भुगतान करेंगे उनको 15 प्रतिशत और जो 91 से 120 दिन में भुगतान करेंगे उनको 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह योजना 31 जनवरी तक लागू है।

 

नई दो साल में आएंगी पांच योजनाएं

मऊ, गाजीपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़ और गोरखपुर में नई आवासीय योजनाओं को शुरू करने के लिए शासन से मंजूरी ली जाएगी। इसको लेकर बोर्ड ने प्रस्ताव पास कर दिया है। इनमें प्रतापगढ़ की 141 हेक्टेयर में आने वाली आवासीय योजना छह महीनें लांच कर दी जाएगी। 
इसी तरह मऊ की योजना 64 हेक्टेयर में आने वाली योजना एक साल के अंदर लांच कर दी जाएगी। इसके अलावा जो अन्य तीन योजनाएं हैं वह करीब डेढ़ साल के अंदर शुरू कर दी जाएंगी।

कानपुर की मंधना योजना का रास्ता साफ, लैंडपूलिंग पर ली जाएगी जमीन

कानपुर की मंधना आवासीय योजना कई साल से जमीन विवाद के कारण लांच नहीं हो पा रही। पांच गांव की योजना में तीन गांव बगदौल, बगदौल कछार और पेम के किसान यह मांग कर थे कि उनकी जमीन भी लैंड पूलिंग योजना के तहत ली जाए, जिसमें जमीन नि:शुल्क ली जाती है और उसके बदले किसान को 25 प्रतिशत विकसित जमीन दी जाती है। परिषद सचिव ने कहा कि 229 हेक्टेयर की यह योजना शुरू हो जाएगी। लैंड पूलिंग सिर्फ तीन गांवों ही लागू होगी क्योंकि यहां पर जमीन का मुआवजा नहीं दिया और अधिग्रहण नहीं हुआ है।

शैक्षिक भूखंड वालों को राहत, एक महीने में पास करा लें मानचित्र

परिषद सचिव ने बताया कि स्कूलों के बहुत से भूखंडों पर लोगों ने पांच साल बाद भी निर्माण नहीं कराया गया। ऐसे लोगों को नोटिस जारी की जाएगी कि वह एक महीनें के अंदर मानचित्र पास कराने का आवेदन कर दे नहीं तो फिर परिषद जुर्माना लगाने और आवंटन निरस्त करने पर विचार करेगा। ऐसे में भूखंडों की तादाद प्रदेश में करीब 100 है।






 

350 करोड़ की फंसी योजना का रास्ता साफ

परिषद सचिव ने बताया गाजियाबाद की वसुंधरा योजना- तीन करीब 15 साल पुरानी है। जमीन लेते समय किसानों को बोर्ड ने 25 से 50 वर्ग मीटर का भूखंड देने का प्रस्ताव पास किया गया था। जिसके बाद उस समय सभी 217 किसानों को 25 वर्ग मीटर के ही भूखंड आवंटित किए गए जिसको लेकर किसान पिछले 12 साल से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इससे परिषद की योजना में फंसी थी। अब बोर्ड ने सभी 35 वर्गमीटर का भूखंड देने का प्रस्ताव पास किया है। इससे परिषद की करीब 350 करोड़ रुपये की फंसी जमीन भी बाहर आ जाएगी और योजना का शुरू किया जा सकेगा।

ई-नीलामी में बदलाव, नहीं बढ़ेंगी हर बार कीमत

परिषद ने उन संपत्तियों के मामले में नियम सरल किया जो बोली में उच्च कीमत आने के बाद बिक नहीं रहीं थी। उप आवास आयुक्त पल्लवी ने बताया कि कई बार लोग ई नीलामी में संपत्तियों की बोली इतनी अधिक लगा देते हैं और खरीदते नहीं हैं। ऐसे में वह फंसा देते थे। यह संपत्तियों जब पिछली बोली के आधार पर दोबारा नीलामी में लगाई जाती थीं तो फिर उतनी बोली आती नहीं थी।

ऐसे में यह सपंत्तियां बिक नहीं पा रही हैं। लखनऊ, कानपुर सहित अन्य शहरों में करीब 50 संपत्तियों फंसी हैं। अब बोर्ड ने यह तय किया है कि दो बार और नीलामी लगाने के बाद यदि पुरानी कीमत नहीं आई तो फिर कीमत को परिषद के रेट के आधार पर नीलामी में लगाया जाएगा।
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यह भी प्रस्ताव किए गए पास

  • मुरादाबाद नगर निगम कार्यालय भवन निर्माण के लिए ग्रुप हाउसिंग के भूखंड का संस्थागत में परिवर्तन
  • सब्सिडीयरी इंटेलीजेंस ब्यूरो को भवन निर्माण के लिए मझोला योजना मुरादाबाद में ग्रपु हाउसिंग के भूखंड पर कार्यालय निर्माण हेतु सहमति
  • प्रतापगढ़ आवासीय योजना के लिए जमीन किसानों से अपासी सहमति से खरीदी जाएगी और डीएम सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा
  • विकास शुल्क निर्धारण के प्रस्ताव पर समिति बनाई गई है वह परीक्षण करेगी उसके बाद बोर्ड में लाया जाएगा।
  • आवास विकास परिषद के कर्मचारियों को 01 जुलाई 2025 से 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाएगा।
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