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यूपी: जानिए मुख्य सचिव बनने की पूरी कहानी, सीएम योगी से हैं आठ साल पुराने संबंध; गलत निकलीं ये अटकलें

Thu, 31 Jul 2025 10:46 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Chief Secretary of UP: मनोज कुमार सिंह का मुख्य सचिव के पद पर सेवा विस्तार होगा। ऐसी चर्चाओं के बीच शाम एसपी गोयल को प्रदेश का नया मुख्य सचिव बना दिया गया। 
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यूपी के नए मुख्य सचिव एसपी गोयल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आईएएस एसपी गोयल करीब आठ वर्ष से मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात हैं। 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाया गया था। इसके बाद अपर मुख्य सचिव के पद पर प्रोन्नत होने के बाद भी वह मुख्यमंत्री कार्यालय में ही बरकरार रहे। वह मनोज कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रदेश के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी बन चुके हैं।

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बता दें कि मूल रूप से लखनऊ निवासी एसपी गोयल का जन्म 20 जनवरी 1967 को हुआ था। बीएससी (ऑनर्स) और एमसीए की पढ़ाई के बाद 1989 में उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में हुआ था। उनकी पहली तैनाती इटावा में असिस्टेंट मजिस्ट्रेट के रूप में हुई थी। तत्पश्चात, बहराइच और अलीगढ़ के सीडीओ बने। वह देवरिया, मथुरा, इटावा, प्रयागराज, अलीगढ़ के डीएम भी रह चुके हैं। वहीं नियोजन, सिंचाई, कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वह अक्तूबर 2014 से मई 2017 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर मानव संसाधन विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

सीएम योगी का जताया आभार
मुख्य सचिव का पदभार ग्रहण करने के बाद एसपी गोयल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस, जीरो करप्शन, औद्योगिक विकास एवं आर्थिक विकास की नीतियों को धरातल पर उतारने पर उनका पूरा जोर रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश को विकास के पथ पर ले जाने तथा प्रदेश को 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के पूरे प्रयास किए जाएंगे।

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अटकलें थीं मनोज कुमार सिंह के सेवा विस्तार की 

राज्य सरकार ने 1989 बैच के आईएएस एसपी गोयल को प्रदेश का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। उन्होंने बृहस्पतिवार शाम करीब 6 बजे निवर्तमान मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह से कार्यभार ग्रहण किया। बता दें कि बीते कई दिनों से मनोज कुमार सिंह का सेवा विस्तार होने की अटकलें लग रही थीं। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार ने इस बाबत केंद्र सरकार को पत्र भी भेजा था, हालांकि देर शाम उनकी जगह एसपी गोयल की ताजपोशी कर दी गई।

बता दें कि एसपी गोयल अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री के पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास नागरिक उड्डयन, राज्य संपत्ति एवं प्रोटोकॉल विभाग की जिम्मेदारी भी थी। अब उन्हें मुख्य सचिव के पद पर तैनात करने के साथ अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, अपर मुख्य सचिव समन्वय विभाग, अध्यक्ष पिकप, यूपीडा एवं उपशा का मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा यूपीडास्प के निदेशक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं नागरिक उड्डयन और राज्य संपत्ति विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रमुख सचिव गृह एवं सूचना संजय प्रसाद को दी गई है।

दो अफसरों को सेवा विस्तार नहीं

मुख्यमंत्री योगी के साथ मनोज कुमार सिंह। - फोटो : amar ujala
बता दें कि मनोज कुमार सिंह से पहले डीजीपी रहे प्रशांत कुमार को भी सेवा विस्तार नहीं मिला था। प्रशांत कुमार को भी सीएम योगी के करीबी अफसरों में शुमार किया जाता था। उनको सेवा विस्तार मिलने की लगातार अटकलें भी लग रही थी, हालांकि उनकी जगह राजीव कृष्ण को डीजीपी बनाने का निर्णय लिया गया था। इसी तरह मनोज कुमार सिंह को भी सेवा विस्तार मिलने की संभावना लगातार जताई जा रही थी। इस पर केंद्र सरकार द्वारा सहमति दिए जाने की भी चर्चा थी, जो एसपी गोयल के मुख्य सचिव बनने के साथ निराधार साबित हो गई।
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8 वर्ष से सीएम के साथ

एसपी गोयल बीते करीब 8 वर्ष से सीएम योगी के कार्यालय में तैनात हैं। प्रदेश में वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री बनाया गया था। तत्पश्चात अपर मुख्य सचिव के पद पर प्रोन्नत होने के बाद भी वह मुख्यमंत्री कार्यालय में बरकरार रहे। मनोज कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद वह प्रदेश के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बन चुके हैं। मूल रूप से लखनऊ निवासी एसपी गोयल का जन्म 20 जनवरी 1967 को हुआ था। बीएससी (ऑनर्स) और एमसीए की पढ़ाई के बाद 1989 में उनका चयन आईएएस सेवा में हुआ था। उनकी पहली तैनाती इटावा में असिस्टेंट मजिस्ट्रेट के रूप में हुई थी। तत्पश्चात, बहराइच और अलीगढ़ के सीडीओ बने थे। वह देवरिया, मथुरा, इटावा, प्रयागराज, अलीगढ़ के डीएम भी रह चुके हैं। वहीं नियोजन, सिंचाई, कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वह अक्तूबर 2014 से मई 2017 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर मानव संसाधन विभाग में ज्वाइंट सेक्रेटी थे।
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