उत्तर प्रदेश में डाटा सेंटर स्थापित करने वाले निवेशकों को अलग-अलग प्रोत्साहनों का लाभ जोड़कर लेने का रास्ता मिलेगा। प्रदेश सरकार की डाटा सेंटर नीति-2026 के तहत ब्याज उपादान की सीमा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पात्र निवेशक सामान्य ब्याज उपादान के साथ एआई कंप्यूट बूस्टर और हरित एवं सतत संचालन बूस्टर की शर्तें पूरी करके कुल लाभ की सीमा बढ़ा सकेंगे। दोनों अतिरिक्त मानकों को पूरा करने पर ब्याज उपादान की अधिकतम सीमा 70 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा के मुताबिक इस व्यवस्था का खास पहलू यह है कि प्रोत्साहन केवल डाटा सेंटर स्थापित करने तक सीमित नहीं है। सरकार ने एआई कंप्यूटिंग क्षमता और पर्यावरण के अनुकूल संचालन को भी अतिरिक्त लाभ से जोड़ा है। यदि किसी निवेशक की नीति के तहत सामान्य ब्याज उपादान की आधार सीमा 50 करोड़ रुपये है, तो एआई कंप्यूट बूस्टर अथवा हरित एवं सतत संचालन बूस्टर की संबंधित शर्तें पूरी करने पर सीमा में अधिकतम 10-10 करोड़ रुपये की वृद्धि होगी। दोनों मानकों को पूरा करने पर कुल सीमा 70 करोड़ रुपये हो जाएगी।
डाटा सेंटर पार्कों के लिए ब्याज उपादान के अतिरिक्त कई अन्य सुविधाओं को भी स्पष्ट किया गया है। इनमें दोहरी ग्रिड बिजली आपूर्ति, भूमि उपादान, स्टाम्प शुल्क में छूट और ट्रांसमिशन और व्हीलिंग शुल्क से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। हरित एवं सतत संचालन बूस्टर के लिए भी शर्तें रखी गई हैं। डाटा सेंटर को मान्य ग्रीन प्रमाणन अथवा नीति में स्वीकार्य समकक्ष प्रमाणपत्र हासिल करना होगा। केवल सामान्य आईएसओ प्रमाणपत्र, स्व-प्रमाणन या मानक ऊर्जा ऑडिट को अपने आप पर्याप्त नहीं माना जाएगा। यानी पर्यावरण के अनुकूल संचालन का दावा करने भर से अतिरिक्त प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।