पुलिस की गोली से नहीं हुई थी मौत
हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। आयोग ने पोस्टमार्टम और बैलिस्टिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चारों की मौत पुलिस की गोलियों नहीं हुई थी। मृतकों के परिजनों ने भी अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए थे।रिपोर्ट के मुताबिक ,हिंसा में 28 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें सात को गोली लगी। एसपी संभल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी घायल हुए। उपद्रवियों ने पुलिस के हथियार और अन्य सामान लूटने का भी प्रयास किया।
पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई प्रभावी
आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को प्रभावी बताते हुए कहा कि पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और संयमित कार्रवाई के कारण हिंसा को व्यापक सांप्रदायिक दंगे में बदलने से रोक लिया गया। पुलिस ने घातक हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे प्रदेश में बड़े स्तर पर तनाव फैलने की आशंका टल गई।
पुरानी घटनाओं का भी जिक्र
रिपोर्ट में संभल के सांप्रदायिक हिंसा के इतिहास का भी उल्लेख किया गया है। आयोग ने कहा कि शहर पहले भी कई बार सांप्रदायिक हिंसा का गवाह रहा है, जिसमें 1978 का दंगा सबसे अधिक विनाशकारी था। आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव देते हुए कहा कि अदालत के आदेशों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और भीड़ के माध्यम से कानून को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।