जांच में पता चला कि ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच जमा कराए गए आयकर विवरण और बैंक में जमा हुई धनराशि में कई गुना का अंतर है। ट्रस्ट ने वर्ष 2020-21 में 12.83 करोड़ रुपये की आय घोषित की, जबकि उसके खाते में 27.39 करोड़ रुपये जमा किए गए। इसी तरह वर्ष 2021-22 में 8.31 करोड़ का आयकर विवरण दिया गया, जबकि बैंक खाते में 25.04 करोड़ जमा हुए। आगे के वर्षों में भी इसी तरह आय से अधिक नकदी जमा होती रही। जांच में यह भी पता चला कि ट्रस्ट ने दान की रकम स्वेच्छा की जगह दबाव डालकर जमा कराई। जांच में कई दानकर्ताओं का पता ही नहीं चला। इससे साफ हो गया कि बिना हिसाब-किताब वाली रकम को दान दिखाकर खाते में जमा कराया गया।
सरकारी धन का दुरुपयोग
जांच में यह भी पता चला कि आजम खां के करीबी ठेकेदारों ने सरकारी भवनों के निर्माण के लिए मिले फंड का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों में किया। छापे के दौरान ठेकेदार शाहीन खान ने बयान दिया कि यूनिवर्सिटी में पेंटिंग, रंगरोगन, टाइल लगाने और अन्य कार्यों के लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला। हालांकि उन्हें आसरा योजना के तहत 6.14 करोड़ रुपये का टेंडर मिला था। इससे स्पष्ट है कि सरकारी योजना के लिए मिले धन को यूनिवर्सिटी में लगाया गया। इसके अलावा भवनों के निर्माण के लिए जरूरी अनुमतियां नहीं ली गईं। वहीं, अग्निशमन के मानकों का पालन नहीं किया गया।