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UP: 250 करोड़ ठगने वालों की कैसी कटी जेल में रात, बिना AC के नींद नहीं आई; रातभर करवट बदलते रहे

Sat, 04 Jul 2026 10:31 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

लखनऊ के फर्जी कॉल सेंटर मामले में गिरफ्तार 119 आरोपियों की पहली रात जिला जेल में कठिन रही। एसी के अभ्यस्त आरोपी गर्मी से परेशान रहे। जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह वीओआईपी के जरिए खुद को एफबीआई अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से करीब 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करता था।

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फर्जी कॉल सेंटर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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फर्जी कॉल सेंटर मामले में गिरफ्तार 119 आरोपियों की जिला जेल में पहली रात मुश्किल से कटी। एसी में रहने वाले युवक-युवतियों को भीषण गर्मी में रहना पड़ा। कई आरोपियों की आंखों से नींद गायब रही। आरोपियों ने बेमन से जेल का खाना खाया। कुछ आरोपी यह कहते सुने गए कि मोटी सैलरी के लालच में की गई नौकरी उन्हें जेल तक पहुंचा देगी, इसका अंदाजा नहीं था।

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जेल सूत्रों के अनुसार, अधिकतर आरोपी अपने भविष्य और परिवार की प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित दिखे। शुक्रवार को आरोपियों से मिलने उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजेंद्र जायसवाल ने बताया कि सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है।

 

समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा

समिट बिल्डिंग के भीतर संगठित गिरोह सोलेरिस सॉल्यूशन के नाम से फर्जी कॉल सेंटर का संचालन कर रहा था। जनवरी 2025 में खोले गए इस सेंटर से गिरोह ने अमेरिकी नागरिकों से करीब 250 करोड़ से अधिक रुपयों की वसूली की। गिरोह के निशाने पर बुजुर्ग या विदेशी महिलाएं रहती थीं। इस मामले में विभूति खंड थाने में केस दर्ज किया गया है।

डीसीपी क्राइम अनिल यादव के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। अब तक की छानबीन में सामने आया है कि टेली कॉलर्स 30 से 40 हजार रुपये वेतन लेते थे। कॉल सेंटर में काम करने वालों के लिए अंग्रेजी अनिवार्य थी ताकि वे विदेशी नागरिकों से बात कर सकें। 

सभी को ट्रेनिंग भी दी गई थी। कॉलर ठगी के लिए वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल सिस्टम का इस्तेमाल करते थे। इनके साथी यूएस में भी मौजूद हैं, जो सभी को गाइड करते थे। मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है। गिरोह में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

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पुलिस को देखकर कई युवतियां रोने लगीं

पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात में छापा मारकर सभी से पूछताछ शुरू की गई। ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार शुरू में पुलिस को गुमराह करते रहे। उधर, पुलिस को देखकर कई युवतियां रोने लगीं। 

बड़ी संख्या में महिला पुलिस को बुलाया गया। मंगलवार देर रात शुरू हुई छानबीन बुधवार शाम तक चलती रही। ललित और विक्रम ने गिरोह के सरगना समेत कुछ बड़े लोगों के नाम लिए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। लखनऊ पुलिस बृहस्पतिवार को पूरे मामले के बारे में जानकारी देगी।

खुद को बताते थे एफबीआई अधिकारी

यूएस में बैठे गिरोह के जालसाजों ने वहां की कंपनियों के टोल फ्री नंबर डुप्लीकेट बना रखे थे। इसे इंटरनेट पर वायरल कर दिया था। जैसे ही कोई व्यक्ति टोल फ्री नंबर तलाश कर उसपर फोन करता था तो वीओआईपी सिस्टम के जरिये उनकी कॉल समिट बिल्डिंग स्थित सेंटर पर ट्रांसफर हो जाती थी। 

इसके बाद टेली कॉलर्स सक्रिय हो जाते थे और बातचीत से लोगों को अपने जाल में फंसा लेते थे। गिरोह के लोग खुद को एफबीआई अधिकारी बताकर पाेर्नोग्राफी के मामले में जेल भेजने की धमकी देते थे। फर्जी कॉल सेंटर से बरामद डिजिटल उपकरण और दस्तावेजों की पुलिस फोरेंसिक जांच कराएगी।
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