कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त तय करते हुए तब तक राज्य सरकार को कई बिंदुओं पर जवाब देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा, क्या प्रशासक नियुक्त करने का आदेश सरकार जारी कर सकती थी? क्या राज्य सरकार पंचायत चुनाव कराने में नाकाम रही?
क्या यह व्यवस्था कार्यकाल बढ़ाने का तरीका है?
अदालत ने टिप्पणी की कि यदि किसी प्रधान का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उसी व्यक्ति को प्रशासक बनाकर पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो क्या इसे उसके कार्यकाल का अप्रत्यक्ष विस्तार नहीं माना जाएगा? अदालत ने कहा कि इस प्रश्न का जवाब संविधान और पंचायत चुनाव से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है।