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UP: प्रदेश के 558 मदरसों को हाईकोर्ट से मिली राहत, अब नहीं होगी ईओडब्लू की जांच; मानवाधिकार आयोग ने की थी मांग

Mon, 22 Sep 2025 09:38 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

प्रदेश के 558 मदरसों की अब आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच अब नहीं होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट से इस संबंध में राहत मिली है। 
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मदरसा स्कूल के बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के अनुदानित 558 मदरसों की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच अब नहीं होगी। केंद्रीय मानवाधिकार आयोग आदेश पर अनुदानित मदरसों की शुरू हुई ईओडब्ल्यू जांच पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को रोक लगा दी। कोर्ट ने मदरसों की जांच कराने के आदेश को आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।

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दरअसल, बाराबंकी निवासी मोहम्मद तलहा अंसारी की शिकायत पर केंद्रीय मानवाधिकारी आयोग के आदेश पर शासन ने आर्थिक अपराध शाखा से जांच शुरू कराई थी। जांच के आदेश के खिलाफ टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया उत्तर प्रदेश और प्रबंध समिति मदरसा मदीनतुल उलूम जलालीपुर बनारस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। एसोसिएशन के महासचिव और याचिकाकर्ता दीवान साहब जमां ने बताया कि रिट याचिका में आयोग के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गई थी। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने एसोसिएशन के वकील जीके सिंह, प्रशांत शुक्ला, मोहम्मद अली औसाफ और एचपी शाही के तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि आयोग कोई सेवा न्यायाधिकरण नहीं है जो नियुक्तियों की जांच करेगा। 

मदरसों का मामला आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने ये भी कहा कि शिकायतकर्ता आदतन शिकायतकर्ता है और पीड़ित व्यक्ति नहीं है, इसलिए उसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं बनता। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने कहा कि मदरसा नियमावली में मदरसों की जांच आर्थिक अपराध शाखा के माध्यम से कराने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए सरकार ईओडब्ल्यू के माध्यम से जांच नहीं करा सकती है। 

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कामिल-फाजिल डिग्री धारक शिक्षकों को बड़ी राहत

दीवान साहेब जमां ने बताया कि कोर्ट के आदेश से सबसे बड़ी राहत कामिल और फाजिल प्रमाणपत्रों से नियुक्त शिक्षकों को मिली है। केंद्रीय मानवाधिकार आयोग ने इन शिक्षकों के वेतन भुगतान को वित्तीय भ्रष्टाचार माना था, क्योंकि इन डिग्रियों को सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय 5 नवंबर, 2024 से प्रभावी है, लेकिन शिकायत में सभी 558 अनुदानित मदरसों में नियुक्त सभी शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। इसके लिए आयोग ने ईओडब्ल्यू जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने बताया कि आयोग के सामने एक ही व्यक्ति की ओर से 55 शिकायतें की गई थीं। जांच के नाम पर मदरसों के लोगों को आतंकित किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने जांच पर रोक लगाकर मदरसों को बड़ी राहत दी है।
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