दीवान साहेब जमां ने बताया कि कोर्ट के आदेश से सबसे बड़ी राहत कामिल और फाजिल प्रमाणपत्रों से नियुक्त शिक्षकों को मिली है। केंद्रीय मानवाधिकार आयोग ने इन शिक्षकों के वेतन भुगतान को वित्तीय भ्रष्टाचार माना था, क्योंकि इन डिग्रियों को सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय 5 नवंबर, 2024 से प्रभावी है, लेकिन शिकायत में सभी 558 अनुदानित मदरसों में नियुक्त सभी शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। इसके लिए आयोग ने ईओडब्ल्यू जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने बताया कि आयोग के सामने एक ही व्यक्ति की ओर से 55 शिकायतें की गई थीं। जांच के नाम पर मदरसों के लोगों को आतंकित किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने जांच पर रोक लगाकर मदरसों को बड़ी राहत दी है।