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यूपी: गुमशुदा लोगों की तलाश में अफसरों के सुस्त रवैए पर हाईकोर्ट दंग, दर्ज करवाई पीआईएल; सुनवाई कल

Wed, 04 Feb 2026 09:04 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Missing persons in UP: प्रदेश में गुमशुदा लोगों की तलाश मामले में अफसरों के सुस्त रवैए पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ, राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए ब्यौरे को देखकर दंग रह गई। 
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यूपी में गुमशुदा लोग। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 प्रदेश में गुमशुदा लोगों की तलाश मामले में अफसरों के सुस्त रवैए पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ, राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए ब्यौरे को देखकर दंग रह गई। कोर्ट के आदेश पर अपर मुख्य सचिव, गृह के पेश किए गए हलफनामे में कहा गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश में करीब 1 लाख 8 हजार 300 गुमशुदा लोगों की शिकायतें दर्ज हुईं। 

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इनमें से सिर्फ 9 हजार गुमशुदा लोगों की तलाश की कारवाई शुरू की गई। कोर्ट ने इसे अचंभित करने वाला करार देकर गुमशुदा लोगों की तलाश के इस मुद्दे को व्यापक जनहित वाला कहा। इसका सख्त संज्ञान लेकर अदालत ने इस मुद्दे पर" इन - री मिसिंग पर्सन्स इन दि स्टेट" शीर्षक से जनहित याचिका दर्ज किए जाने का निर्देश देकर इसे सुनवाई के लिए 5 फरवरी को समुचित खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ ने यह आदेश राजधानी के विक्रमा प्रसाद की याचिका पर दिया। याची ने पिछले साल जुलाई में गुम हुए अपने 32 साल के पुत्र की तलाश की गुहार की है। याची का कहना था कि 17 जुलाई 2024 को उसने चिनहट थाने में पुत्र की गुमशुदगी की सूचना दी थी। कारवाई न होने पर याची ने जब 27 नवंबर को यह याचिका दाखिल की तब 1 दिसंबर को कोर्ट के आदेश के बाद 2 दिसंबर को उसकी एफ आई आर दर्ज हो पाई। मामले में कोर्ट के आदेश पुलिस कमिश्नर ने पहले जवाब दाखिल किया, जिससे अदालत संतुष्ट नहीं हुई। इसके बाद अदालत ने अपर मुख्य सचिव, गृह से निजी हलफनामे पर प्रदेश के गुमशुदा लोगों की तलाश की कार्यप्रणाली का ब्योरा मांगा था, जिसपर, इसी 29 जुलाई को उनके निजी हलफनामे पर ब्योरा पेश किया गया।

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कोर्ट ने कहा कि यह आंकड़ा चौकाने वाले

कोर्ट ने कहा यह ब्योरा चौकाने वाला है और गुमशुदा लोगों की शिकायतों पर अफसरों की यह कारवाई मामले में उनकी गंभीरता में कमी दिखाता है। उनके इस रवैए पर हम स्तब्ध हैं। इसपर प्राधिकारियों की तरफ से जल्द ध्यान देने की जरूरत है।

कोर्ट ने याची विक्रमा प्रसाद को छूट दी कि वह, अपर मुख्य सचिव गृह के दाखिल निजी हलफनामे का जवाब दाखिल कर सकता है। साथ ही कहा कि व्यापक जनहित वाले इस मामले को संबंधित अदालत के समक्ष याची प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई किए जाने का अनुरोध भी कर सकता है।
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