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यूपी: नौकरी छोड़कर कर रहे हैं किसानी, मां की कैंसर की बीमारी ने बदला खेती करने का नजरिया; जानिए पूरी कहानी

Thu, 05 Jun 2025 01:48 PM IST
रोहित मिश्र अभिषेक राज, अमर उजाला, लखनऊ

सार

Progressive farmers in UP: यह कहानी एक प्रगतिशील किसान की है। जिसने नौकरी को छोड़कर खेती करना शुरू किया। मां की बीमारी ने भी नई तरीके की खेती करने के लिए प्रेरित किया। 
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गोंडा के परसपुर चरहुवां निवासी पवन सिंह का हो चुका है सम्मान। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मां को कैंसर से तड़पते और फिर उनकी मौत को देखा। हमेशा लगता कि मां की बीमारी की वजह खेती में प्रयोग होने वाली कीटनाशक और रासायनिक खाद है। मां की मौत से हताश होने की बजाय ऑर्गेनिक खेती की ठानी। आज स्थिति ये है कि गोंडा के परसपुर चरहुवां निवासी पवन सिंह और उनकी पत्नी गीता खेती से डॉलर, येन और थाई बाट में कमाई कर रहे हैं। उनकी जैविक उपज बुद्धा राइस यानी कालानमक चावल, कल्हरी दाल, कोदो, सांवा और मोरिंगा की विभिन्न देशों में मांग है। इसकी पूर्ति ई कॉमर्स साइट के जरिए हो रही है।
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परसपुर की गिनती गोंडा के पिछड़े इलाकों में होती है। लेकिन इस दंपती ने यहां से तरक्की की मिसाल कायम की है। उन्होंने खेती को ऐसे साधा है कि मिट्टी आज सोना उगल रही है। इनकी तरक्की का कहानी की शुरुआत होती है 28 दिसंबर 2019 से। दंपती ने गोनार्द फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के नाम से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का गठन किया। आज इस एफपीओ ने पहचान बना ली है। अब तक छह सौ से अधिक किसान इससे जुड़ चुके हैं और रसायनमुक्त जैविक खेती कर मालामाल हो रहे हैं।

वार्षिक आय की बात करें तो पति-पत्नी 70 से 80 लाख रुपये कमा रहे हैं। इनके उत्पाद अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध हैं। ऑर्गेनिक इंडिया को भी जैविक उत्पाद सप्लाई कर रहे हैं। पवन कहते हैं कि गुणवत्ता ही ब्रांडिंग का आधार रही। अपने जैविक उत्पाद को वैश्विक बाजार के मानक के अनुसार प्रमाणित कराते हैं। सहयोगी किसानों की उपज की खुद निगरानी करते हैं। इस सफलता के पीछे उनकी मां की बीमारी और कष्ट छुपा हुआ है।
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पवन बताते हैं कि बात 2012 की है। मां केवलपति सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई। जांच में पता चला कि लिवर कैंसर है। यह खबर उनके परिवार के लिए एक बड़े सदमे जैसी थी। हर कोशिश की। लेकिन मां को बचा नहीं सके।मां को कैंसर से तड़पते देख पवन ने संकल्प लिया कि अब खेती में न कीटनाशक का उपयोग करेंगे और न ही रासायनिक खाद का। यहीं से उनकी जैविक खेती की शुरुआत हुई। आज पूरे 50 एकड़ क्षेत्रफल में जैविक खेती लहलहा रहे हैं। बुद्धा राइस को थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका, जापान, सिंगापुर और नेपाल में भी सप्लाई कर रहे हैं।
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