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पैसे की कमी दूर करेगी सरकार, नहीं थमेगा विकास

Tue, 22 Dec 2015 10:49 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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पैसे की कमी सूबे की विकास योजनाओं में रोड़ा न बने इसके लिए सरकार नाबार्ड के ग्रामीण अवस्थापना विकास निधि (आरआईडीएफ) से प्रदेश को मिलने वाली सहायता का तय आवंटन बढ़वाने में जुट गई है। चालू वित्त वर्ष में प्रदेश के लिए सुरक्षित फंड की सीमा 900 करोड़ रुपये और बढ़ाने का आग्रह किया गया है।
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सूबे में सड़क, सिंचाई, पुल, नलकूप, अस्पताल, पंप कैनाल जैसी ग्रामीण अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए प्रदेश सरकार नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त करती है।

वित्त वर्ष 2015-16 के लिए नाबार्ड ने यूपी का आवंटन 1600 करोड़ तय कर रखा है। इस सीमा तक की विभिन्न परियोजनाओं के लिए सरकार अपने दावे नाबार्ड को भेज सकती है। मगर, अब इसमें बढ़ोतरी की मांग की गई है।
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प्रमुख सचिव वित्त राहुल भटनागर ने बड़े प्रदेश व ग्रामीण अवस्थापना कार्यों की बढ़ती आवश्यकताओं का हवाला देते हुए नाबार्ड से 2015-16 का आवंटन 1600 से बढ़ाकर 2500 करोड़ करने का आग्रह किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नाबार्ड ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाया है और जल्द फैसले की उम्मीद है।
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सरकार सहायता बढ़वा रही, विभाग लेने में सुस्त

प्रदेश सरकार नाबार्ड से वित्तीय सहायता का कोटा बढ़वाने में जुटी है लेकिन कई विभाग उसका फायदा लेने में बेहद सुस्त नजर आ रहे हैं। पशुधन व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक भी प्रस्ताव नहीं भेजा। दूसरी ओर दुग्ध विकास विभाग ने लक्ष्य से अतिरिक्त सीमा का प्रस्ताव भेजा है जिस पर नाबार्ड ने सहमति का संकेत दे दिया है। कृषि विभाग भी लक्ष्य के हिसाब से परियोजनाएं सौंप चुका है।

विभाग--ले सकते हैं सहायता--भेजा प्रस्ताव
सिंचाई (सिविल)--600--457.34
सिंचाई (मेकेनिकल)--808--335.59
लघु सिंचाई--450--57.69
लोक निर्माण--600--482.37

ग्रामीण क्षेत्रों में पुल--288--46.48
कृषि विभाग--350--351.22
दुग्ध विकास--451--1225.85
पशुधन विभाग--160--
माध्यमिक शिक्षा--50--

ऋण सीमा 500 करोड़ बढ़ाने की मांग
इसके अलावा सरकार नाबार्ड से प्रदेश की ऋण प्राप्त करने की सीमा भी बढ़ाने की मांग की है। प्रदेश की ऋण लेने की सीमा अभी 1500 करोड़ रुपये है। शासन ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से इसे बढ़ाकर 2000 करोड़ करने की मांग की है।
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