बिजली कंपनियों का 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज राज्य सरकार चुकाएगी। यही नहीं, अब बिजली कंपनियों द्वारा बैंकों व केंद्रीय वित्तीय संस्थाओं से लिए गए कर्ज पर ब्याज दर भी 12.5 फीसदी से घटकर 8-8.5 फीसदी हो जाएगी।
इससे बिजली कंपनियों को 2100 करोड़ रुपये कम ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा। बिजली कंपनियों को घाटे से उबारने के लिए केंद्र सरकार की उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) पर शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में राज्य सरकार व बिजली मंत्रालय के बीच एमओयू पर दस्तखत किए गए।
इसमें बिजली कंपनियों के लिए परफॉर्मेंस सुधारने के मानक भी तय कर दिए गए हैं, ताकि आगे चलकर वे आत्मनिर्भर हो सकें।
एमओयू पर दस्तखत के बाद प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल ने बताया कि बिजली कंपनियों पर कुल 53,211 करोड़ रुपये का कर्ज है। उदय योजना के तहत इसके 75 फीसदी यानी 39,908 करोड़ रुपये के भुगतान का दायित्व अब राज्य सरकार ने अपने ऊपर ले लिया है। राज्य सरकार मूलधन की रकम पांच वर्ष में चुकता करेगी।
अगले चार-पांच साल में घाटे से उबर सकेंगी कंपनियां
वहीं, अभी तक ऋणों पर ब्याज के रूप में लगभग 6,385 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता था। यह घटकर 4200 करोड़ के आसपास रह जाएगा।
‘उदय’ लागू होने के बाद बिजली कंपनियों का सालाना घाटा 7000 करोड़ रुपये से कम होकर लगभग 1500 करोड़ रुपये रह जाने की उम्मीद है। अगले चार-पांच साल में कंपनियां घाटे से उबर सकती हैं।
सूत्रों का कहना है कि शेष 13,303 करोड़ रुपये के कर्ज की अदायगी के लिए मौजूदा औसत ब्याज दर से करीब तीन फीसदी कम ब्याज दर पर बांड जारी किए जाएंगे जिसकी गारंटी राज्य सरकार लेगी।
बिजली कंपनियों पर किसका कितना कर्ज
संस्था--कर्ज की रकम (करोड़ रुपये में)
बैंक--27,312
आरईसी--10,495
पीएफसी--9,340
हुडको--794
बांड्स--5,270
बिजली कंपनियों के लिए मानक तय
- 2018-19 तक एकीकृत वितरण एवं वाणिज्यिक लाइन हानियां 32 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी तक लाना।
- ट्रांसमिशन हानियों में 3.95 फीसदी कमी लाकर 17700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाना।
- लाइन हानियां उस स्तर तक लाना जिससे बिजली कंपनियों का घाटा पूरी तरह समाप्त हो सके।
- पांच वर्ष में औसत आपूर्ति लागत व राजस्व वसूली के अंतर को समाप्त करना।
- सितंबर 2016 तक सभी फीडरों पर मीटरिंग।
- 2018 तक सभी वितरण ट्रांसफार्मरों पर स्मार्ट मीटर लगवाना।
- 2018 तक गांवों में सिंचाई व घरेलू बिजली के फीडर अलग करना।
-बिजली की खपत वाले एलईडी बल्ब, कृषि पंपों, पंखों, एयरकंडीशनरों और अत्याधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना।
सीएम ने की केंद्र सरकार की तारीफ
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ‘उदय’ योजना को प्रदेश में लागू किए जाने के संबंध में केंद्र सरकार के साथ हुए एमओयू का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार एक साथ एक लक्ष्य के लिए प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं और वह लक्ष्य है देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की जनता को 24 घंटे बिजली आपूर्ति।
उन्होंने खुशी जाहिर की कि इस संबंध में केंद्र सरकार भी हमारे साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्तूबर 2016 से सूबे के ग्रामीण इलाकों में कम से कम 16 घंटे एवं शहरी क्षेत्रों को 22 से 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।