उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने विशेष अपीलों पर सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार ने मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष जवाब दाखिल किया। इसमें कहा कि सरकार 50 से अधिक बच्चों वाले स्कूलों का विलय या पेयरिंग नहीं करेगी। इसके साथ ही प्राथमिक स्कूलों की दूरी एक किमी से दूर नहीं होगी।
अदालत के सामने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए विलय के कुछ दस्तावेजों में साफ अनियमितताएं सामने आई थीं। राज्य सरकार की ओर से इनका स्पष्टीकरण देने का समय मांगा गया था। इसके मद्देनजर कोर्ट ने सीतापुर जिले में स्कूलों की विलय/ पेयरिंग प्रक्रिया पर 21 अगस्त तक मौजूदा स्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था।
गौरतलब है कि बीती 7 जुलाई को स्कूलों के विलय मामले में एकल पीठ ने प्रथामिक स्कूलों के विलय आदेश को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्रथामिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था।
इनमें बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बीती 16 जून को जारी उस आदेश को चुनौती देकर रद्द करने का आग्रह किया गया था। इसके तहत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का प्रावधान किया गया था।