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80 हजार करोड़ का बजट लाने की तैयारी में यूपी सरकार

Sun, 14 Aug 2016 08:00 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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अखिलेश सरकार का पूरा अमला खास तौरपर वित्त विभाग 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले अब तक के सबसे बड़े अनुपूरक बजट के जरिए चुनावी समीकरण साधने की कोशिश में जुटा है।
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मुख्यमंत्री इस बजट के जरिए अगली बार सत्ता में आने पर विकास का नया रोडमैप भी दिखाने की कोशिश में हैं। दरअसल यह अनुपूरक बजट अखिलेश सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह आखिरी बजट है।

वित्त मंत्रालय सूत्रों ने दावा किया है कि खर्च के लिए बहुत कम समय होने के बावजूद यह अब तक का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट होगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव संभवत 23 अगस्त को विधानसभा में ये अनुपूरक बजट पेश कर सकते हैं।
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नई प्राथमिकताओं को अहमियत मिलने की संभावना

- फोटो : demo pic
प्रदेश के वित्त महकमे ने 2016-17 के अनुपूरक प्रस्तावों के  परीक्षण का काम पूरा कर लिया है। सूत्रों ने बताया कि विभागों की ओर से करीब 80 हजार करोड़ रुपये के अनुपूरक प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए हैं।

महकमे ने मुख्यमंत्री के विकास एजेंडा में शामिल योजनाओं के अलावा मुख्यमंत्री की घोषणाओं और सूबे में चल रही अधूरी परियोजनाओं को चिह्नित कर अनुपूरक की प्राथमिकताएं तय कर ली हैं।

सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रही आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे व लखनऊ मेट्रो के लिए सरकार पहले ही पैसे का बंदोबस्त कर चुकी है।

अनुपूरक में समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, गोमती चैनलाइजेशन, सड़क मरम्मत, साइकिल हाइवे, पिछले साल बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की सहायता, सिंचाई परियोजनाओं व सरकार के प्रचार-प्रसार मद में बड़े बजट का बंदोबस्त किए जाने के संकेत हैं।
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अपने गृह क्षेत्र को भी दे सकते हैं महत्व

- फोटो : amar ujala
अनुपूरक बजट में इटावा, कन्नौज, फैजाबाद व आगरा से जुड़ी विभिन्न विभागों की परियोजनाओं के लिए भी अनुपूरक में पूरे तवज्जो के संकेत हैं।

सरकार कर्मचारियों के कैशलेश इलाज की सुविधा व बिजली के ट्रांशमिशन व वितरण नेटवर्क से जुड़ी बिजली परियोजनाओं के लिए भी पैसे का प्रावधान कर सकती है। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हें कि वित्त वर्ष 2015-16 में लाए गए 19825 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट तब तक का सबसे बड़े अनुपूरक बजट था।

मौजूदा सरकार अगले अनुपूरक बजट का आकार इससे भी बड़ा रखने की मशक्कत में जुटी हुई है। हालांकि इसका आकार कितना बड़ा होगा, इसका संकेत कैबिनेट के पहले बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही हो पाएगा।

दिसंबर में ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता की अटकलें हैं। पर, आम लोगों से सीधे जुड़े कामों के लिए बजट प्रावधान और कई नई योजनाओं का एलान कर कर सरकार अपने चुनावी समीकरण को लेकर ठोस संकेत तो दे ही देगी।

दूसरा, बजट प्रावधान होने की वजह से परियोजनाएं ऑन गोइंग प्रोजेक्ट में शामिल हो जाएंगी और चुनाव के बीच भी उन पर काम जारी रह सकेंगे। लाजिमी है कि इसका फायदा सरकार को ही मिलेगा।
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