मदरसों को अनुदान देने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की घोषणा पर पानी फिर रहा है। अनुदान देने के लिए सरकार ने जो मानक तय किए हैं उस पर ज्यादातर मदरसे फिट नहीं बैठ रहे हैं।
अनुदान के लिए 194 मदरसों के प्रस्ताव मिले लेकिन इनमें 15-20 ही मानकों को पूरा कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2012 में सरकार बनाने के साथ ही प्रदेश के 146 मदरसों को अनुदान देने की घोषणा की थी।
जिस समय घोषणा हुई उस समय तय हुआ कि वर्ष 1998 तक स्थापित मदरसों को ही इसमें लिया जाए। लेकिन जब प्रस्ताव मांगे गए तो वह काफी कम रह गए।
इसके बाद सरकार ने वर्ष 2003 तक के मदरसों से प्रस्ताव देने के लिए कहा। जिसके बाद सरकार को 194 मदरसों के प्रस्ताव मिले। लेकिन तब से दो वित्तीय वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अभी तक मदरसे अनुदानित नहीं हो सके हैं।
ये हैं प्रमुख दिक्कतें
दरअसल, अनुदान के लिए जो आवेदन आए हैं उनका दो स्तरों पर परीक्षण कराया गया। सबसे पहले अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय में परीक्षण हुआ। सूत्रों के अनुसार 194 प्रस्तावों में आधे से ज्यादा मदरसे ऐसे मिले जो मानक पूरे नहीं कर रहे थे।
इस कारण अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने अपनी जो रिपोर्ट सरकार को भेजी है उसमें ज्यादातर मदरसों के आवेदन अस्वीकार करने की संस्तुति की। इसके बाद सरकार ने भी अपने स्तर पर आवेदन पत्रों का परीक्षण कराया।
इसमें भी ढेर सारे मदरसे मानकों में खरे नहीं उतर पाए। ज्यादातर मदरसों में कुछ न कुछ कमियां पाई गईं। केवल 15-20 मदरसे ही ऐसे मिले जो पूरी तरह से मानकों में फिट पाए गए। अब सरकार पसोपेश में है कि मुख्यमंत्री ने घोषणा 146 मदरसों को अनुदान देने की की थी।
ऐसे में इतने कम मदरसों को किस तरह अनुदान दिया जाए। साथ ही इन्हें अनुदान सूची में लेते ही बाकी मदरसे न्यायालय भी जा सकते हैं। सरकार मदरसा संचालकों की नाराजगी भी मोल लेना नहीं चाहती है।
अफसर निकाल रहे बीच का रास्ता
सीएम की घोषणा पूरी करने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के अधिकारी मानकों को शिथिल करने का रास्ता निकालने में जुट गए हैं।
इसी को लेकर मंगलवार को सचिव अल्पसंख्यक कल्याण एसपी सिंह की अध्यक्षता में मदरसा अनुदान समिति की हाईपावर कमेटी की बैठक हुई।
इसमें कहा गया कि जरूरी नहीं है कि एक साथ सभी मदरसों को अनुदान दे दिया जाए। इसलिए सबसे पहले उन मदरसों के प्रस्ताव पेश किए जाएं जो मानक पूरे करते हैं।
इसके बाद मानक शिथिल करने के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार किया जाए। इसमें मदरसा संचालकों को मानक पूरे करने के लिए समय दिया जा सकता है।
मदरसों में ये मिलीं कमियां
मदरसों में 12 शिक्षक होने चाहिए लेकिन ज्यादातर में शिक्षक पूरे नहीं हैं।
-कई मदरसों ने पुराने शिक्षक हटाकर पैसे लेकर नई तैनाती कर दी
-कुछ मदरसों ने अपने रिश्तेदारों को ही शिक्षक रख लिया
-कई मदरसों में निर्धारित योग्यता के शिक्षक नहीं हैं
-कई मदरसों ने फर्जी छात्रसंख्या दिखा दी
-कई मदरसों के पास अपनी जमीन नहीं है
-कई मदरसों के पास पर्याप्त कक्ष नहीं है
-कई मदरसों की प्रबंध समिति पर ही है विवाद
ये हैं अनुदान के फायदे
अनुदान मिलने के बाद मदरसों को 12 शिक्षकों (आलिया के लिए चार, फौकानिया के लिए तीन व तहतानिया के लिए पांच) के अलावा प्रधानाचार्य व दो कर्मचारियों के पद स्वीकृत हो जाते हैं।
इनका पूरा वेतन सरकार देती है। मदरसा अनुदानित होने के बाद कई तरह की सुविधाएं व योजनाओं का पैसा भी इन्हें मिलता है।
इससे सरकार पर प्रति मदरसा करीब 50 लाख रुपये सालाना का बोझ आता है।