‘राजभाषा हिंदी का सबसे ज्यादा प्रचार-प्रसार गैर हिंदी भाषियों ने ही किया है। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, सी. राजगोपालाचारी आदि ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसे में जब भी कोई मराठी या दूसरी क्षेत्रीय भाषा बोलने वाला हिंदी बोले तो उसका मजाक उड़ाने की जगह उसे प्रोत्साहित करें।
राज्यपाल राम नाईक ने बुधवार को यहां जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया सभागार में आयोजित क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन और पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि यह बात कही। राज्यपाल ने कहा कि मैं मराठी भाषी क्षेत्र से हूं। ऐसे में मेरी हिंदी में मराठी लहजा है। अगर हम हिंदी का इस्तेमाल बढ़ाना चाहते हैं तो हमें गैर हिंदी भाषियों के हिंदी बोलने पर उन्हें प्रोत्साहित करना होगा।
उन्होंने कहा कि मैं खुद उस राज्य का राज्यपाल हूं जहां सबसे ज्यादा हिंदी बोलने वाले लोग हैं। जहां की आबादी दुनिया के सिर्फ पांच देशों से ही कम है।
राज्यपाल ने कहा कि हिंदी दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं की बड़ी बहन है। छोटी बहनों का जब विकास होगा तभी हिंदी का विकास होगा। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इनकी वजह से गैर हिंदी भाषी शहरों में भी लोग इस भाषा के साथ सहज होते हैं। उन्होंने हिंदी को सरल बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकारी कामकाज में भी गैर हिंदी भाषी लोगों का ध्यान रखा जाए।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने राजभाषा विभाग की सचिव नीता चौधरी, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त गिरीश नरायन पांडेय, एसबीआई के मुख्य महाप्रबंधक कर्नम शेखर और निदेशक कार्यान्वयन हरिंदर कुमार के साथ पत्रिका ‘राजभाषा भारती’ के हिंदी दिवस विशेषांक का विमोचन भी किया।