उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने संसदीय कार्य व नगर विकास मंत्री मो. आजम खां की काबिलियत पर सवाल खड़ा किया है। राज्यपाल ने कहा है कि विधानसभा की कार्यवाही से संसदीय कार्य मंत्री के वक्तव्य के 33 फीसदी हिस्से को हटाया जाना यह साबित करता है कि उनकी भाषा सदन की गरिमा, मर्यादा और परंपरा के अनुकूल नहीं है।
सदन में आजम खां का वक्तव्य उनके संसदीय कार्य मंत्री की इस योग्यता पर प्रश्न चिह्न के समान है कि क्या वह इस कार्य के योग्य हैं? नाईक का कहना है कि वह इस विषय पर मुख्यमंत्री से बात करेंगे। यही नहीं राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय की टिप्पणी को भी गंभीर मानते हुए उन्हें वार्ता के लिए राजभवन बुलाया है।
गौरतलब है कि विधानसभा में आठ मार्च को मेयरों को हटाने संबंधी विधेयक को रोके रखने से नाराज आजम ने राज्यपाल पर तल्ख टिप्पणियां की थीं। राज्यपाल ने नौ मार्च को विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर विधानसभा में अपने ऊपर की गई टिप्पणी की असंपादित व संपादित मुद्रित प्रति और ऑडियो-वीडियो सीडी मांगी थी।
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से 15 मार्च को राज्यपाल को सारी जानकारी भेज दी गई थी। इसका अध्ययन व परीक्षण करने के बाद नाईक ने शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में आजम की योग्यता पर ही सवालिया निशान लगाते हुए कहा है कि इस बाबत उन्हें मुख्यमंत्री से भी बात करनी पड़ेगी। राज्यपाल ने अपने पत्र की प्रति मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी भेजी है।