किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार एक अभिनव प्रयोग करने जा रही है। ग्राम स्तर पर हजारों की तादाद में छोटी-छोटी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कराई जाएंगी, जिनकी लागत का आधा खर्च सरकार उठाएगी। इसके लिए जल्द ही नई खाद्य प्रसंस्करण नीति लाने की योजना है।
शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस स्कीम को आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ‘गेम चेंजर’ के तौर पर लाया जा रहा है। योजना से ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचाने की तैयारी है। इसके तहत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में गेहूं, धान, दाल, सरसों, मक्का, मसाले, हल्दी, तुलसी और औषधीय फसलों समेत विभिन्न तरह के कृषि उत्पादों के क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे।
इन क्लस्टर से संबंधित छोटी-छोटी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां ही उसी क्षेत्र में लगाई जाएंगी। इनमें आटा, धान व तेल मिल, बड़ी व पापड़ बनाने वाली इकाइयां, मसाला, पॉपकॉर्न, शहद व दाल पैकेजिंग यूनिट, आचार, मुरब्बा और आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने वाली इकाइयां शामिल हैं।
6 लाख तक होगी इकाई लागत, 3 लाख तक मदद देगी सरकार
अगर पहले से किसी इलाके विशेष में कोई खास कृषि उत्पाद पैदा किया जा रहा है, तो उससे संबंधित इकाई ही उस क्षेत्र में लगाई जाएगी। पहले से स्थापित इकाई को अपग्रेड करने के लिए भी मदद दी जाएगी। अभी तक प्रदेश में छोटी खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने पर अधिकतम एक लाख रुपये की सब्सिडी मिलती है।
प्रस्तावित पॉलिसी में इकाई की लागत 5 से 6 लाख रुपये रखते हुए इसका आधा खर्च 2.5 लाख से 3 लाख तक सरकार वहन करेगी। नई पॉलिसी में औद्योगिक नीति के सभी प्रावधान शामिल किए जाएंगे। खाद्य पदार्थों से संबंधित ओडीओपी उत्पादों को भी इसमें जगह मिलेगी।
जल्द कैबिनेट में पेश होगा प्रस्ताव
प्रस्तावित नीति में बड़ी यूनिट लगाने पर स्टांप ड्यूटी में छूट समेत कैपिटल सब्सिडी की व्यवस्था होगी। हालांकि, मुख्य फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर छोटी प्रसंस्करण इकाइयां लगाना है, ताकि इनमें स्थानीय किसानों के उत्पादों की खपत और लोगों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिल सके। इसके लिए प्रदेश में विभिन्न क्लस्टर चिह्नित करते हुए ड्रॉफ्ट तैयार किया जा रहा है। जल्दी ही इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई खाद्य प्रसंस्करण नीति लाने जा रहे हैं। - आलोक सिन्हा, कृषि उत्पादन आयुक्त