प्रदेश सरकार गाजियाबाद भू-उपयोग परिवर्तन घोटाले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। यह घोटाला पिछली सरकारों के शासनकाल में हुआ था। इसमें गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की लागत पर भू उपयोगकर्ताओं को 572.48 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाया गया था। इसका खुलासा सीएजी की रिपोर्ट में हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में आने के बाद विकास प्राधिकरणों की सीएजी से ऑडिट कराने का निर्णय किया था। सीएजी ने जीडीए में अक्तूबर 2010 से अक्तूबर 2013 तक भू उपयोग परिवर्तन की जांच कर इस घोटाले का खुलासा किया। पता चला कि प्राधिकरण ने विभिन्न विकासकर्ताओं की 4722.19 एकड़ भूमि का लेआउट प्लान मंजूर किया था।
इसमें उप्पल चड्डा हाईटेक डेवलपर्स प्रा. लि. को अक्तूबर 2010 से अक्तूबर 2013 तक 4004.25 एकड़ भूमि, सन सिटी हाईटेक इंफ्रा प्रा. लि. को जुलाई 2011 में 717.94 एकड़ जमीन पर लेआउट प्लान मंजूर किया गया था। इनमें से उप्पल चड्डा हाईटेक डेवलपर्स की 2985.03 एकड़ व सन सिटी इंफ्रा की 717.94 एकड़ भूमि महायोजना 2021 में हाईटेक डाउनशिप के रूप में सांकेतिक रूप से चिह्नित थी।
इस पर विकासकर्ताओं को 572.48 करोड़ रुपये का भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क देना था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने 23 अप्रैल 2010 को एक आदेश जारी किया, जिसके तहत विकासकर्ताओं पर शुल्क नहीं लगाया गया। इससे प्राधिकरण को 572.48 करोड़ रुपये की हानि हुई। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सरकार इसमें कानूनी कार्रवाई करेगी।