मेला समिति हर छह माह में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से बैठक करेगी। इसमें बिंदुवार प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। मेले के लिए शुल्क, टोल या उपयोगकर्ता प्रभार लगाने पर असहमति होने पर डीएम सामान्यत: समिति की सलाह को स्वीकार करेगा। यदि सलाह स्वीकार्य न हो तो समिति मामले को मंडलायुक्त के समक्ष भेजेगा। इस पर मंडलायुक्त का फैसला अंतिम होगा। मेले के आयोजन के संबंध में अनुमाति व्यय के लिए मेला समिति सीएसआर फंड और मेले से प्राप्त होने वाली निकाय की आय को विस्तृत कार्य योजना में शामिल किया जाएगा।
प्रांतीय मेले के आयोजन के लिए खर्च की व्यवस्था सीएसआर फंड, मेले से होने वाली निकाय की आय से सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य सरकार के अन्य विभागों जैसे लोक निर्माण, सिंचाई जल संसाधन, पुलिस विभाग और पंचायती राज्य विभाग के वित्तीय स्रोतों से कराया जाएगा। इसके अलावा जिलाधिकारी द्वारा नगर विकास विभाग से पैसे की मांग की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए आवासीय सुविधा के लिए टेंट व पेयजल की सुविधा दी जाएगी। बैरिकेडिंग, वॉचटावर के साथ सूचना तंत्र की व्यवस्था होगी। अस्थाई प्रकाश व्यवस्था, सजावट, नाव, नाविक, गोताखोर की जरूरत पर व्यवस्था होगी। अस्थाई सड़क, अस्थाई शौचालय की सुविधा दी जाएगी।
सरकार ने मेला को धनराशि दिए जाने के लिए श्रद्धालुओं की संख्या को मानक बनाया है। संख्या के आधार पर धनराशि भी तय की दई है। मेले में 5 से 10 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ वाले मेले के लिए सरकार जहां 25 से 50 लाख रुपए देगी, वहीं, 10 से 20 लाख की भीड़ वाले मेले पर 50 से 75 लाख और 20-40 लाख भीड़ वाले मेले पर 75 से एक करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसी तरह 40 से 60 लाख भीड़ वाले मेले के लिए 01 से 1.25 करोड़ और 60 से अधिक भीड़ वाले मेले के लिए सरकार 1.25 से 1.50 करोड़ रुपये देगी।