प्रवक्ता ने आंकड़ों का ब्योरा देते हुए बताया कि मौजूदा समय में इंसेफेलाइटस से होने वाली मौत की दर 3.73 प्रतिशत है। वर्ष 2016 में ‘एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम’ (एईएस) से पीड़ित 3911 मरीज भर्ती हुए थे, जिसमें से 641 की मौत हुई थी, जबकि 2017 में भर्ती 4724 मरीजों में 655 की मौत हुई थी।
प्रवक्ता ने दावा किया है कि सत्ता परिवर्तन के बाद से इंसेफेलाइटिस को नियंत्रित करने पर किए गए फोकस की वजह से आंकड़े काफी कम हुए हैं। वर्ष 2019 में 3077 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 248 लोगों की मौत हुई।
इसी तरह ‘जापानी इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम’ (जेईएस) के मरीजों की संख्या में भी काफी कमी है। वर्ष 2016 व 2017 में जहां इस रोग से 74 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2018 में यह आंकड़ा घटकर 30 पर आ गया है।