सरकारी सेवाओं व सुविधाओं का लाभ लेने वालों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पेश ‘उ.प्र. आधार (वित्तीय और अन्य सहायिकाओं, प्रसुविधाओं और सेवाओं का लक्ष्यित परिदान) विधेयक 2017’ बुधवार को विधानसभा में पास कर दिया गया।
इसके अलावा व्यवसाय संघ (उ.प्र. संशोधन) विधेयक, 2017 भी पारित हो गया। विधेयकों को सदन की प्रवर समिति के पास भेजने संबंधी विपक्ष का प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकार हो गया।
सरकार की कल्याणकारी सामाजिक योजनाओं, अनुदान, सुविधाओं को आधार से जोड़ने संबंधी विधेयक को प्रवर समिति को सुपुर्द करने का प्रस्ताव रखते हुए सपा के संजय गर्ग ने कहा कि आधार का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
शीर्ष अदालत ने बैंक अकाउंट व पैन कार्ड को आधार से जोड़ने की अवधि 31 मार्च तक बढ़ा दी है। सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए इसकी अनिवार्यता का कोई औचित्य नहीं है।
यह निजता के अधिकार का हनन है। बसपा के लालजी वर्मा ने आधार कार्ड बनवाने में आ रही दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि इसे तत्काल आवश्यक नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं, सपा के नरेंद्र वर्मा ने व्यवसाय संघ विधेयक पर संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए इसे प्रवर समिति को सुपुर्द करने की मांग की। उनका कहना था कि इसके प्रावधान छोटे व्यवसायियों के हित में नहीं हैं।
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने इन विधेयकों को जनहित में बताते हुए कहा कि इससे लोगों को सहूलियत होगी।